448 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
मुसलमानों की एक संस्था ने एक करोड़ रुपया एकट्ठा करने और हमारे लिए
खर्च करने की सोची है तो सिक्ख समाज ने लाखों रुपये जोड़ कर आपकी उन्नति के लिए खर्च करने के बारे में निश्चय किया है। इसके विरुद्ध हिंदू धर्मियों की तस्वीर है। वे आंखें मूंद कर बैठे हुए हैं। आंखों पर चमड़ी ओढ़ कर बैठे हिंदू समाज से आपकी कोई मदद तो नहीं ही की जाती उल्टे इस समाज की ओर से आपकी प्रगति की राह में अडं़गे खडे़ किए जा रहे हैं। इसलिए आपका उनसे उद्धार नहीं होगा, इस बात को आप ध्यान में रखिए। प्रगति के इस युग में हमें अपना मार्ग हिंदू धर्म से अलग होकर ही बनाना होगा। हमारे स्वाभिमान और विकास को धक्का पहुंचाए बगैर जो अपनी प्रगति और विकास के लिए समानता के भाव से मदद करेंगे उस धर्म से सहकार्य हमें करना चाहिए।
पुरखों का धर्म सीने से लगाए बैठने में कोई मतलब नहीं है। झूठे अभिमान का हमें त्याग करना चाहिए। हिंदू धर्म में चातुर्वर्ण्य की घातक प्रथा है और उसके नष्ट होने के कोई आसार भी दिखाई नहीं देते। इस चातुर्वर्ण्य के और वर्णाश्रम धर्म के कारण हमारा बहुत नुकसान हुआ है। वर्णाश्रम धर्म के अनुसार ब्राह्मणों के अलावा अन्य कोई भी विद्या प्राप्त नहीं कर सकता, क्षत्रियों के अलावा कोई भी शस्त्र धारण नहीं कर सकता। ऐसी वर्णव्यवस्था ने हमारे पूर्वजों को अज्ञानी और निर्बल बनाया था। वर्णाश्रम धर्म ने हमें ज्ञान, सŸा, शस्त्र और संपिŸा का उपयोग ही नहीं करने दिया। इसी वर्णाश्रम धर्म ने हमारे पूर्वजों की प्रतिकार शक्ति नष्ट कर दी। विकास, प्रगति के मार्ग पर उनके कदम पड़ने ही नहीं दिए। लेकिन आज हमारी स्थिति वैसी नहीं है। आजकल हर किसी के लिए प्रगति के द्वार खुले हैं। शस्त्रधारण करना चाहें तो उसके लिए मार्ग खुले हैं, विकास का मार्ग खुला है। ऐसी स्थितियों में अगर अपने पूर्वजों के धर्म से लिपटकर बैठे रहेंगे, तो आप कभी भी उन्नति नहीं कर पाएंगे। मैं आपको चेतावनी देकर कहता हूं कि आप ज्ञान और शक्ति संपादन करें, रीति-रिवाजों के झूठे बंधन तोडें़ और बढ़-चढ़ कर अपनी उन्नति के मार्ग पर अग्रसर हों। इस पर शांतिपूर्वक, गहराई से सोचें। प्रगति के पथ पर कदम बढ़ा कर उज्ज्वलता का रास्ता अख्तियार करें।
अब, राजनीति के बारे में जो सवाल हैं उस पर आते हैं। साल भर में मुंबई इलाका और भारत में नया संविधान लागू होने वाला है। उस संविधान को लेकर आपके क्या कर्त्तव्य हैं यह आपको बताने की मेरी इच्छा है। आज तक आप अपनी समस्या को दूर करने के लिए सरकारी अफसरों के पास अर्जी भेजा करते थे। आपको लगता था कि इन अर्जियों के कारण आपकी तकलीफें दूर होंगी। कलक्टर राजा होता है, ऐसा आपको लगता है। वैसे कलक्टर राजा तो होता है एक मायने में क्योंकि, आजकल नौकरशाहों का ही राज चलता है। लेकिन अगले साल से यह