83. वोट बेचना अपराध तो है ही साथ ही वह आत्मघात भी है - मार्च 1936 वेढ़ी पालघर (ठाणे) - Page 466

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तस्वीर बदलने वाली है। एक साल के बाद राजनीति में नौकरशाही का कोई अलग स्थान या सŸा नहीं होगी। नए संविधान के अनुसार सभी अधिकार विधिमंडल के पास रहेंगे और विधिमंडल के आगे कलक्टर और तहसीलदार को भी झुकना होगा। यानी, विधिमंडल आगे चलकर काफी महत्त्वपूर्ण बनने जा रहा है। उस विधिमंडल में हमें महत्त्वपूर्ण स्थान प्राप्त हुआ है। राजनीति का भवितव्य विधिमंडल पर निर्भर होगा। इसीलिए अच्छे लोगों का विधिमंडल में शामिल होना जरूरी है। सेठ, साहूकार पैसे वाले विधिमंडल में अपने लिए जगह बनाना चाहते हैं। लेकिन इन लोगों से गरीबों का कल्याण होना संभव नहीं है। इसके लिए आपको गरीबों के साथ मिल-जुल कर काम करने वालों को, गरीबों की इच्छा-आकांक्षाओं का अहसास होने वालों को, निस्वार्थी, निर्भीक, लायक तथा मतदाताओं से ईमानदारी से पेश आने वाले लोगों को चुनना होगा। अपने असली हितचिंतकों को अगर हम विधिमंडल में चुन कर भेजें तो ही अपने कदम आगे बढ़ सकते हैं और अपने हितों का संवर्धन हो सकता है।

प्रत्याशियों को चुन कर विधिमंडल भेजने के लिए हमें मताधिकार मिला है। यह अधिकार बहुत ही बड़ा और महत्त्वपूर्ण अधिकार है। इसलिए ध्यान रखना होगा कि अपनी मतदान की शक्ति गलत जगह ज़ाया न हो। सच्चे, ईमानदार और जिन्हें हमारे हित की चिंता हो ऐसे उम्मीदवारों के बारे में मैं आपको सही समय पर जानकारी दूंगा और आप उन्हीं को अपना मत देना।

फिलहाल हमारे देश में अमीर लोग वोट खरीदते हैं, लेकिन वोट कोई बेचने की वस्तु नहीं हैं। वह हमारी सुरक्षा का साधन है। वोट बेचना गुनाह तो है ही, साथ ही वह आत्मघात भी है। वोट बेच कर विधिमंडल में नालायक लोगों की भर्ती करने से देश का अपरिमित नुकसान होता है और राष्ट्र की अवनति होती है। जो खुद नालायक होंगे और अयोग्य होंगे लेकिन धन के बल पर विधिमंडल में शामिल होने की चाह रखते होंगे वे आपको धन का लालच देंगे। दरिद्रता के कारण अपना वोट बेचने के बारे में आपके मन में मोह उत्पन्न होगा। ऐसे किसी भी मोह के आप बिल्कुल शिकार न हों। मोह के शिकार होंगे, तो आप अपने पैरों पर पत्थर मार लेंगे। आज मैं आप सब लोगों को यह चेतावनी दे रहा हूं। जिन लोगों को समाज से समर्थन प्राप्त नहीं होता, वे ही वोट खरीदना चाहते हैं। वोट खरीद कर वे अपनी योग्यता सिद्ध करना चाहते हैं। ऐसे नाकाबिल लोगों से समाज या राष्ट्र के हित का कोई काम नहीं हो सकता। अमीर आदमी अगर विधिमंडल में सदस्य बन कर पहुंच गया तो वह सिर्फ धनी लोगों के हितों की ही रक्षा करेगा। हमारे जैसे गरीबों के हितों की रक्षा में वह अडं़गा बनेगा। इसीलिए मैं आपसे कहता हूं कि अपना वोट ना बेचें। मुझे पूरा यकीन है कि आप अपना वोट नहीं बेचेंगे। अमीरों के दिए किसी भी लोभ का आप शिकार न बनिए। उनकी दिखाई भूलभुलैया में अपनी राह भूल कर भटक नहीं जाइए।