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प्रस्ताव 6 : अखिल अस्पृश्य समाज का मुखपत्र है ‘जनता’, हर गांव का अस्पृश्य
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समाज इस अखबार का ग्राहक बने। साथ ही परिषद की ओर से सबसे विनति की जा रही है कि अगर कभी जरूरत पडे़ तो ‘जनता’ को आर्थिक मदद दें और अपने अखबार की उन्नति के लिए तथा उसके विकास के लिए अस्पृश्य समाज हमेशा कोशिश करे। प्रस्ताव रखा धोंडिराम गायकवाड़ ने और अनुमोदन दिया सदाशिवराव सालवी ने।
प्रस्ताव 7 : आसपास के इलाके में यदि अस्पृश्य समाज द्वारा किसी पुराने
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रीति-रिवाजों का अनुसरण किया जा रहा हो तो अबके बाद वे उनका त्याग करें। शादी-ब्याह जैसे कार्यक्रमों के दौरान शिक्षा जैसे समाज के हित को बढ़ावा देने वाले काम में मदद दें। प्रस्ताव रखा श्री लक्ष्मण मानोजी गायकवाड़ और उसका समर्थन किया गोपाल महादेव जाधव ने।
प्रस्ताव 8 : अगले महिने में मुंबई में अखिल महार समाज का सम्मेलन आयोजित
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किया गया है। परिषद की ओर से सम्मेलन में उपस्थित हो उसे सफल बनाने की प्रार्थना की जा रही है। इस होने वाले सम्मेलन में आसपास के सभी महार बंधू हिस्सा लें प्रस्ताव रखा दिवाकर पगारे ने और उसे समर्थन दिया संभाजी बाबा गायकवाड़ ने।
प्रस्ताव 9 : इस सम्मेलन को सफल बनाने के लिए जिन-जिन लोगों ने मेहनत
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की उन सभी के प्रति परिषद की ओर से आभार व्यक्त किया जाता है। प्रस्ताव रखा गायकवाड़ ने और समर्थन दिया जाधव ने।
इन सभी प्रस्तावों पर जोरदार और विचारोŸोजक भाषण हुए। सभी प्रस्ताव तालियों की गड़गड़ाहट में आम सहमति से पारित हुए। उसके बाद डॉ. अम्बेडकर ने एक बार फिर दो शब्द कहें। उसके बाद आभार प्रदर्शन के कार्यक्रम के बाद बड़े जोश भरे वातावरण में यह सम्मेलन संपन्न हुआ। वहां से लौटते समय वसई स्टेशन पर नासिक के महिपतराव विठूजी निले, दामूजी नामदेव निले, वाघूजी करडक मिस्त्री, पुलाजी उमाजी पाटारे, नानासाहब गणोजी बोराडे, श्रावण भैरवराव आदि लोगों ने डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर और परिषद से लौटे लोगों का गौरवपूर्ण सम्मान कर उन्हें फलाहार दिया।