84
वर्धा में 1 मई, 1936 के दिन सुबह डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर आए। तब वहां के
अस्पृश्य समाज ने बडे़ उत्साह के साथ उनका स्वागत किया। सेठ जमनालाल बजाज
और गांधी ने सेठ वालचंद हीराचंद के साथ उनसे मुलाकात की। वे नालवाड़ी भी
गए। ‘निर्भय युवक संघ’ ने उनका वर्धा में अच्छा-खासा बन्दोबस्त रखा। गांधी से
मुलाकात के लिए वे शेगाव ख्1, गए थे। दोपहर 11.30 बजे अस्पृश्य समाज के कार्यकŸार्
पुरुषोत्तम खापर्डे, शंकरराव सोनवणे, गोमाजी टेंभरे आदि से भेंट कर उन्होंने धर्म
परिवर्तन के बारे में चर्चा की।
इस अवसर पर हुई चर्चा में अम्बेडकर ने साफ तौर पर बताया कि,
”मैंने अब तक किसी से मुसलमान या ईसाई धर्म स्वीकार करने के लिए नहीं
कहा है। अगर कोई अपनी मर्जी से मुसलमान या ईसाई धर्म को स्वीकार, समर्थन
करते हैं तो वे खुद फंस जाएंगे और उनकी गलती के लिए मैं जिम्मेदार नहीं रहूंगा।
मैंने धर्मांतरण की घोषणा की है, लेकिन अब तक किसी धर्म को स्वीकारने के लिए
किसी से कहा नहीं है। जब तक मैं किसी से नहीं कहता तब तक धर्मांतरण के
प्रचार का काम ही चलता रहे। लेकिन किसी विशिष्ट धर्म की तरफदारी न करें।
जब मैं कहूंगा तभी हम सब सात करोड़ अस्पृश्य लोग मिल कर एक साथ धर्म
परिवर्तन करेंगे।“
उसके बाद डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर ने अन्य अस्पृश्य नेताओं से व्यक्तिगत तौर
पर चर्चा की।
* विदर्भ दलित आंदोलन का इतिहास : हि. ल. कोसारे पृ : 296
- वर्धा जिले के सेवाग्राम का जिक्र शायद इस तरह किया गया हो - संपादक