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इस महीने के पहले हफ्ते में डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर नागपुर-वन्हार्ड के आसपास दौरे पर गए थे। रविवार 3 मई, 1936 के दिन दोपहर में नागपूर स्टेशन पर हजारों अस्पृश्य उनके स्वागत के लिए इकट्ठा हुए थे। मि. एस. समिउल्लाखान और रावसाहब आर. डब्ल्यू. फुले नागपूर म्युनिसिपालिटी की ओर से स्वागत के लिए स्टेशन आए हुए थे। बीड़ी कामगार यूनियन के लोग भी आए हुए थे। शाम को टाऊन हॉल में उन्हें नागपूर म्युनिसिपालिटी की ओर से मानपत्र प्रदान किया गया। मानपत्र का आशय इस प्रकार था -
‘‘सार्वजनिक कार्यों के अलग-अलग क्षेत्रों में आपने काम किया है। अस्पृश्यों के कल्याण के लिए राजनीतिक और सामाजिक कार्य में अत्यंत उत्साह, धीरज के साथ आपने लगातार परिश्रम किए हैं। नासिक और महाड में सत्याग्रह कर हिंदू समाज को उनकी चिरकालीन निद्रा से जागृत किया है। अस्पृश्य वर्ग में स्वाभिमान की ज्योत जगा कर समाज में उनके न्यायपूर्ण अधिकारों का अहसास उन्हें दिलाया। अस्पृश्य वर्ग के हकों के लिए और समाज में सही दर्जा पाने के लिए आंदोलन करने का सारा श्रेय आप ही को जाता है। ऑल इंडिया डिप्रेस्ड क्लासेस फेडरेशन आपके परिश्रम की साक्ष्य देता है।
राजनीतिक मामलों में भी आपने ऊंचा दर्जा हासिल किया है। साइमन कमीशन को सहकार्य देने के लिए मुंबई लेजिस्लेटिव काउंसिल द्वारा नियुक्त की गई कमेटी के सदस्य के नाते आपने जो भिन्न मत-पत्रिका लिखी है, उससे आपकी कुशाग्र बुद्धि के दर्शन होते हैं। इतना ही नहीं, अपने देश के हितसंबंधों की रक्षा करने को लेकर आपकी चिंता भी इसमें व्यक्त होती है। गोलमेज सम्मेलन में अस्पृश्य वर्ग की ओर से आपने जोरदार समर्थन दर्ज किया और ‘पुणे समझौता’ के बारे में आपका कार्य जगजाहीर है, उसका जिक्र करने की भी जरूरत नहीं पड़ती।
मानपत्र का जवाब देते हुए डॉ. बाबासाहेब ने कहा,
”म्युनिसिपालिटी से मानपत्र लेने का मेरे जीवन का यह दूसरा मौका है। कई म्युनिसिपालिटियों ने मुझे मानपत्र देने की इच्छा व्यक्त की, लेकिन मानपत्र न स्वीकारने की नीति का मैं अनुसरण करता हूं। हो सकता है कि किसी के मन में यह सवाल उठे
* जनता : 23 मई, 1936