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सातारा जिला, महार परिषद का अधिवेशन, 1926 की मई में जिला सातारा के
कोरेगांव तहसील के रहिमतपुर में डा़ॅ. बाबासाहेब अम्बेडकर की अध्यक्षता में हुआ था।
डॉ. अांबेडकर मुंबई से रहिमतपुर आए और महारवाड़ा में रहे। मुंबई से शिवतरकर,
वलमाली, गायकवाड़, खोलवडीकर, खंडकर, जावले आदि तो पुना से कृष्णराव कदम,
मा.सा. गायकवाड़, जनार्दन रणपिसे, धर्माजी सावंत आदि और फलटण से माधवराव
अहिवले आदि सातारा जिले के लोग अधिवेशन के लिए आए थे। अधिवेशन दोपहर
तीन बजे शुरू हुआ। सातारा जिले की प्रमुख हस्तियां, धनजीभाई कूपर, एजुकेशनल
एडमिनिस्ट्रेटिव आफिसर, सीताराम रावजी तावडे, मामलेदार दुदुस्कर, रामचंद्र
ग. सोमण, वकील आदि अधिवेशन के लिए उपस्थित थे। बहिष्कृत वर्ग के योग्य व्यक्ति
को जे.पी. बनाने का प्रस्ताव पारित हुआ। सोमण ने इस प्रस्ताव का विरोध किया।
उनके विरोध भाषण का सारांश यह था कि देश में आजादी की लड़ाई चल रही है
और बहिष्कृत वर्ग सरकार से उपाधियां देने की मांग कर गुलामी को समर्थन दे रहा
है जो ठीक नहीं है। सोमण का भाषण खत्म होते ही बाबासाहेब उठ खड़े हुए उनका
चेहरा गुस्से से लाल हो गया था। उन्होंने अपने अध्यक्षीय भाषण में कहा-
हिन्दू समाज के सफेदपोश लोग और खासकर ब्राह्मणों ने देशबंधुओं को धर्म के
नाम पर अपने पैरों तले दबाकर रखा और यही हिन्दू, मुस्लिम और अंग्रेज शासकों
के पांव चाटकर ऐशो-आराम की जिंदगी जीते रहे। इन्हीं लोगों ने अपने धर्मबंधुओं
और देशबंधुओं को दूसरों और अपनी गुलामी में बांधकर रखा और उन्होंने ही पांच
सौ साल गुलामी को कायम रखा और अब यही लोग राजनीतिक गुलामी के विरूद्ध
आवाज उठा रहे हैं। यही लोग अब कांग्रेस के झंडे-तले इकट्ठा होकर राजनीतिक
स्वतंत्रता हासिल करने के लिए यातनाएं, देह दंड सहने को, जेल जाने को तैयार
हैं। यही लोग अस्पृश्यों को सामाजिक और धार्मिक स्वतंत्रता देने को तैयार नहीं हैं।
इन लोगों ने सारे देश और जनता का हर तरह से सत्यानाश किया है। यदि किसी
को मेरे इस बयान के बारें में ऐतिहासिक जानकारी चाहिए हो तो मैं देने को तैयार
हूं। मेरा कहना झूठ है ऐसा अगर किसी को यहां कहना है तो बताइए। मैं उसका
खंडन करने के लिए तैयार हूं। जैसे-जैसे अस्पृश्यों के हाथों में आर्थिक सŸा और
संपिŸा आएगी, वैसे-वैसे उनकी प्रगति होती रहेगी। जे.पी. होना या विधायक होना
प्रगति हासिल करने के साधन हैं और हमें उन्हें हासिल करना ही चाहिए। जब
सोमण जैसे लोग कहते हैं कि हम उन्हें नहीं लें इसका मतलब कि वे हम लोगों में
मतभेद पैदा करके उसी गुलामी को बनाए रखने का खेल खेल रहे हैं। सोमण के