454 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
कि मैं इतना कृतघ्न क्यों हूं? लेकिन इसमें कृतघ्नता कोई नहीं है। राष्ट्रीय अखबार और संस्थाओं की नजर में मैं कोई बड़ा आदमी नहीं हूं। मुझे हमेशा लगता रहा है कि लोग मेरा गौरव करें अथवा न करें मेरा काम पवित्र है। इस तरह के जो मानपत्र दिए जाते हैं, उनमें सुधार के बारे में महानता दिखाने के लिए जो झूठ लिखे जाते हैं, उसमें ‘कन्वेन्शनल लाइज ऑफ सिविलाइजेशन ’का बड़ा हिस्सा होता है। मानपत्र न लेने के अपने निर्णय के लिए मैंने पहला अपवाद वसई म्युनिसिपालिटी के बारे में किया। कुछ मित्रों की खातिर मुझे वह स्वीकारना पड़ा। नागपूर म्युनिसिपालिटी इसका दूसरा अपवाद है और मुझे इस बात का दुख भी नहीं है। म्युनिसिपालिटी के सदस्यों ने इस मानपत्र का खर्चा खुद वहन करने की बात मान ली है। इसी से मैं मानता हूं कि इस मानपत्र के साथ भावनाएं भी जुड़ी हैं।
आज के कार्यक्रम का राजनीतिक मंच के तौर पर इस्तेमाल करने के लिए आप मुझे माफ करें। मेरे बारे में लोगों में तरह-तरह की गलतफहमियां फैलाई जा रही हैं। मुझ पर लोग अपने टीकास्त्र जितना तराशते हैं उतना किसी और पर शायद ही तराशते होंगे। मेरी आलोचना करने वालों का रुख ऐसा है कि उन्हें लगता है अल्पसंख्यकों के नाम से जो करार मशहूर है, उसका असल गुनहगार मैं हूं। गोलमेज सम्मेलन में मैंने जो नीति सामने रखी थी उसके बारे में मुझे कोई खेद नहीं है। गोलमेज सम्मेलन में मैंने जो काम किया है, उसे पढ़ने की अगर आपने तकलीफ की तो आप समझ जाएंगे कि विभिन्न समस्याएं हल करने के बारे में मैंने जो सूचनाएं रखी थीं वे कई राष्ट्रीय स्तर के नेताओं की रखी सूचनाओं से बेहतर दर्जे की थीं। मैं जो कह रहा हूं उसका साक्ष्य खुद गांधी देंगे।
अल्पसंख्यकों ने गोलमेज सम्मेलन में जो नीति पेश की थी वह न्यायपूर्ण थी। इतना ही नहीं, मेरे मत में वह उदारता भरा भी था। आयरलैंड अल्स्टर वालों ने होमरूल के आंदोलन में जो जवाब दिया था उसकी तरफ मैं आपका ध्यान दिलाना चाहूंगा। अल्स्टर में प्रोटेस्टंट अल्पसंख्यक थे और दक्षिण आयर्लंड में रोमन कैथलिक बहुसंख्या में थे। दक्षिण आयर्लंड के प्रतिनिधि श्री रेडमंड ने अल्स्टर वालों से कहा, ष्आप जो चाहें वे सहूलियतें दूंगा, लेकिन इंग्लैंड से जाकर नहीं मिलना, होमरूल को समर्थन दें।ष् तब कार्सन ने उनसे कहा, ष्आग लगे आपके होमरूल को, हम कैथलिकों के राज्य में नहीं रहेंगे।ष् गोलमेज सम्मेलन में भारत के अल्पसंख्यकों ने कहीं भी क्या यह कहा है कि, सुरक्षा मिले या न मिले, हम हिंदुओं के राज्य में नहीं रहेंगे? बिल्कुल नहीं कहा है। डोमिनियन स्टेटस या होमरूल की राह में हमने कोई अडं़गे खडे़ नहीं किए। हमने सिर्फ इतना ही कहा कि हमें सुरक्षा प्रदान करें। हममें और अन्य देशों के अल्पसंख्यकों में यही महत्त्वपूर्ण फर्क है।