85. राजनीतिक सत्ता का उपयोग न्यायपूर्ण और उदार बुद्धि से करना होगा - मई 1936 नागपूर - Page 472

455

अब अगर सुरक्षा के बारे में बोलना हो तो, रोम साम्राज्य में भी पेट्रिशियन्स और प्लेबियन्स इस तरह के दो हिस्से थे और उनके चुनाव पृथक चुनाव क्षेत्र से ही होते थे। पृथक चुनाव क्षेत्र बनाने में कोई पाप नहीं। उसमें कोई कारस्तानी (षड्यंत्र) नहीं है। बहुसंख्य हिंदुओं से मेरा यही कहना है कि अब आप बहुसंख्य हैं इसलिए जो सŸा आपके हाथ में आएगी, उसका न्यायपूर्ण ढंग से और उदारता से उपयोग करें। भारत की राजनीतिक उन्नति अगर थम गई तो उसकी जिम्मेदारी आपके ऊपर होगी। हमें मिले अधिकार अल्पसंख्यकों के फायदे के लिए, आप जिस अनुपात में प्रयोग में लाएंगे, उसी अनुपात में यह बात तय होगी कि आपने अपनी जिम्मेदारी सही ढंग से निभाई है अथवा नहीं। आपने जो मानपत्र दिया है उसके लिए एक बार और मैं आपको धन्यवाद देकर अपनी बात पूरी करता हूं।श्

उसके बाद उपाध्यक्ष रावसाहेब फुले ने डॉ. अम्बेडकर और मेहमानों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा, कि अल्पसंख्यकों की मांगों के बारे में हिंदुओं को कोई शिकायत नहीं है, उनका कहना तो सिर्फ यही है कि स्पृश्यों के साथ जो नीति वे अपनाएंगे वह राष्ट्रीयत्व की पोषक हो और जातियों के बीच पल रही द्वेष की भावना को खत्म करने वाली हो। हिंदी राष्ट्र को जातियों में विभाजित करनेवाली नीति न अपनाएं। डॉ. अम्बेडकर की गोलमेज सम्मेलन में अपनाई नीति राष्ट्रीयता के लिए पोषक थी, यह हम मानते हैं। सभी अल्पसंख्यक अगर राष्ट्रीयता के लिए पोषक नीति अपनाएंगे तो हिंदू समाज को चाहे जितना स्वार्थत्याग करना पडे़, किसी को उसके बारे में शिकायत नहीं होगी।

इसके बाद कार्यक्रम समाप्त हुआ।