86. सैंकडों साल प्रतीक्षा करने के बाद भी, जो कार्य नहीं हो पाता, वह इन दस सालों में हुआ है - मई 1936 नागपूर - Page 473

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सैंकडों साल प्रतीक्षा करने के बाद भी, जो कार्य नहीं हो पाता, वह

इन दस सालों में हुआ है

3 मई, 1936 के दिन नागपूर म्युनिसिपालिटी के मानपत्र समारोह के बाद शाम के समय नागपूर के अस्पृश्य बंधुओं की कस्तुरचंद पार्क में सार्वजनिक सभा हुई। उस सभा में हजारों भाई-बहन उपस्थित थे। पूरे नागपूर शहर में डॉ. अम्बेडकर के जयकार की गूंज रही थी। डॉ. बाबासाहेब पर टीकास्त्र चलाने वाले आलोचक और नेता नागपूर से गायब हो गए थे। उनका कहीं अता-पता नहीं था। डॉक्टर साहब के प्रेम के, उन पर के भरोसे के कारण अपना सब कुछ भूल कर कार्य करने के लिए तत्पर हुआ हजारों का अस्पृश्य जन समुदाय डॉक्टर साहब का भाषण सुनने के लिए उत्सुक हुआ था। डॉक्टर साहब जब भाषण करने के लिए मंच पर पधारे तब तालियों की गड़गड़ाहट और उनके नाम की जयकार से करीब पांच मिनट तक वातावरण गूंजता रहा।

डॉ. बाबासाहेब ने अपने भाषण में पिछले दस सालों में आंदोलन के कारण अस्पृश्य समाज में आए बदलावों का सिंहावलोकन किया। उन्होंने में कहा,

”सैंकड़ों सालों तक प्रतीक्षा करने के बाद भी जो काम नहीं हो पाता, वह दस वर्षों की इस अल्पावधि में हुआ है। यह सब काम केवल अपने स्वाभिमान के और अपनी आत्मनिर्भरता के आंदोलन के कारण ही हुआ है। काँग्रेस की तरह हमारे पास पैसा नहीं है। सार्वजनिक रूप से काम करने के लिए हमारे पास काँग्रेस की तरह अन्यों का समर्थन भी नहीं। इतनी सारी दिक्कतों को पार करते हुए हमने पिछले दस सालों में अपने आंदोलन को बहुत व्यापक बना दिया है। यह सब हो पाया है, आपके प्रेम के कारण, काम करने की आपकी आतुरता के कारण। पिछले दस सालों में यह आपके दृढ़ संकल्प से चमत्कार हुआ है, जिसके कारण पूरे समाज को, काँग्रेस को भी, अस्पृश्यों की धाक माननी पड़ी है। इसका कारण है आपके द्वारा दिखाई गई एकता। कुछ लोगों का अपवाद अगर छोड़ भी दें तो हमने जो एकता दिखाई है उसके कारण बाकी समाज की नजर में हमारा राजनीतिक महत्व बढ़ा है। धर्म परिवर्तन की हमने जबसे घोषणा की है तब से मुसलमान, सिक्ख और ईसाइयों के मुंह में पानी आया हुआ है और वे हमारी दाढ़ी तक छूने के लिए, मिन्नतें करने को तैयार हुए हैं। आज तक हमने जो एकता दिखाई है, उसे हमें कायम रखना होगा,

* ‘जनता’ 23 मई, 1936