86. सैंकडों साल प्रतीक्षा करने के बाद भी, जो कार्य नहीं हो पाता, वह इन दस सालों में हुआ है - मई 1936 नागपूर - Page 474

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जिससे कि हिंदू धर्म से अलग होने के अपने ध्येय को हम पा सकेंगे।

हाल ही में जोधपूर और गुजरात में स्पृश्य हिंदुओं ने अस्पृश्यों पर भयंकर अत्याचार किए हैं। अत्याचार की यह गुलामी अगर नष्ट करनी हो तो धर्मांतरण के बगैर हमारे सामने कोई और चारा नहीं है। हिंदुओं को यदि अंग्रेज डोमिनियन स्टेटस दे रहे हैं फिर भी अगर वे अंग्रेजों के राज्य में नहीं रहना चाहते तो हम क्यों हिंदुओं के राज्य में रहें? एक पेड़ के नीचे दूसरा पेड़ पनपता नहीं। उसे सूरज की रोशनी जब तक नहीं मिलती वह बढे़गा नहीं। हिंदू धर्म के इस जीर्ण वृक्ष के नीचे हमारा विकास संभव नहीं है। इसीलिए हम धर्म परिवर्तन करेंगे ही।“

इस सभा में भी मुसलमान लोगों की अधिक उपस्थिति थी। कुछ मुसलमान सभास्थल के पड़ोस में नमाज पढ़ रहे थे। इसी तरह, सुनने में आया है, अस्पृश्य नेताओं को डॉ. अम्बेडकर के कार्यक्रम के लिए जिन मोटरों की जरूरत थी वे अन्य धर्म के लोगों ने, ईसाई पादरियों और मुसलमान नेताओं ने बडे़ आनंद के साथ उपलब्ध कराईं । इस सभा में एक भी प्रमुख हिंदू नेता या धर्मांतरण विरोधक अस्पृश्य कार्यकर्ता उपस्थित नहीं था।