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का सवाल उठाया तभी हमने उन्हें चेताया था कि अस्पृश्यता के सवाल की तरफ दुर्लक्ष, अनदेखी ना करें। लेकिन अस्पृश्यता का सवाल स्वराज्य का एक अंग है, कह कर वह चुप रहे। एक बात हमारी समझ में नहीं आती कि, हमने धर्म परिवर्तन की घोषणा की तो हिंदुओं को उस पर आपिŸा क्यों हो? हिंदू धर्म अगर हमें हिंदू कहने के लिए तैयार नहीं है, तो हम खुद को हिंदू क्यों कहलाएं? जिस धर्म में समता, प्रेम और अपनत्व की भावना नहीं हैं, उस धर्म को मैं धर्म कहने के लिए तैयार नहीं हूं। दो हजार साल पहले हमारे पूर्वज अज्ञानी थे। किसी भी तरह की विद्या प्राप्त करने की या शस्त्र हाथ में धरने की उन्हें अनुमति नहीं थी। इसीलिए कोई नया काम करने का साहस उनमें नहीं था। अज्ञान के कारण उनका मन मार कर उन्हें कमजोर बना दिया गया था। उन्होंने चार वर्णों के चौखटे में हिंदू धर्म को बिठा रखा है। इसी वर्णव्यवस्था के कारण अगर हम ब्राह्मणों से अव्वल हुए तब भी हमें गुलामी के काम ही करने होते थे। इसी गुलामी की वजह से हमारे पूर्वज अपना स्वाभिमान पूरी तरह भूल गए। लेकिन आज स्थितियां बदल गई हैं। इस स्थिति में हिंदू धर्म के अनुदार चौखटे में हमसे रहा नहीं जा सकता। इसीलिए हमें यह धर्मांतरण की घोषणा करनी पड़ रही है।“
इसके बाद डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर को फूलों की मालाएं अर्पण कर उनके प्रति आभार व्यक्त किया गया। सभा जयघोष के बीच संपन्न हुई।