88. अपने मिट्टी के मोल जीवन को सोने जैसे दिन प्राप्त हों, इसलिए धर्मांतरण की आवश्यकता है - मई 1936 कल्याण (ठाणे) - Page 481

464 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

करना जरूरी लग रहा है। अपने मिट्टी के मोल जीवन को सोने के दिन दिखाने के लिए मुझे धर्म परिवर्तन करना जरूरी लग रहा है। आपकी हालत में सुधार लाने के लिए मुझे अपने सहयोगी दोस्तों से जरूर सहायता मिलेगी इसका मुझे यकीन है। आपको काबिल बनाने के लिए मुझे धर्म परिवर्तन करना है। अपने हित के बारे में चिंता करने की मुझे कोई जरूरत नहीं है, उस बारे में मैं बिल्कुल बेफिकर हूं। आज मैं जो कुछ भी कर रहा हूं वह आप लोगों के हित के लिए कर रहा हूं। मुझे आप ईश्वर मानते हैं। लेकिन मैं ईश्वर नहीं हूं। मैं आप ही की तरह एक इंसान हूं। मुझसे आप जो भी मदद पाना चाहते हैं, वह देने के लिए मैं तैयार हूं। मैंने तय किया है कि आपकी आज की जो हालत है, उससे मैं आपको मुक्ति दिला दूं। मैं अपने लिए कुछ नहीं कर रहा। आपको काबिल बनाने की कोशिशें मैं बस करता रहूंगा। आप अपने हालात के बारे में जान लीजिए। मैं जो राह दिखा रहा हूं उसे अपनाइए। इससे आपका हित साध्य होगा और आपकी काबिलियत सामने आएगी।