466 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
अस्पृश्यों के धर्म परिवर्तन का सवाल बहुत ही महत्वपूर्ण है। इस समस्या से संबंधित अस्पृश्यों की नीति तय करना अस्पृश्यों का कर्त्तव्य ही नहीं, अपितु यह उनकी जिम्मेदारी है। डॉ. बाबासाहेब के मतानुसार, अस्पृश्यों की अलग-अलग जातियों की अलग-अलग परिषदें आयोजित कर उसमें इस सवाल पर विचार किया जा सकता है, और अस्पृश्य जनता का इस बारे में, क्या सोच है, क्या विचार है, यह जाना जा सकता है।
इस सूचना के अनुसार मुंबई इलाके के सभी महार भाई-बहनों को विनती पूर्वक सूचित किया जाता है कि मुंबई इलाके के सभी महारों की प्रातिनिधिक स्वरूप की एक परिषद मुंबई शहर में अगले मई महीने में आयोजित करना तय हुआ है। परिषद में अपने परमपूज्य नेता डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर ने धर्म परिवर्तन के बारे में जो घोषणा की है, उस संदर्भ में हमारे समाज की नीति क्या होनी चाहिए, इस संदर्भ में निर्णय लिया जाएगा। इसीलिए इस परिषद में हिस्सा लेने के लिए, हर जिले से, तहसील से, और हर गांव से अपने प्रतिनिधियों को भेज कर परिषद को सफल बनाएंगे, ऐसी मैं उम्मीद करता हूं।
अपना यह काम बहुत बड़ा और महत्त्वपूर्ण होने की वजह से इस काम में पैसों की और लोगों की भी बहुत जरूरत है। इसीलिए, मुंबई शहर के रहने वालों के लिए और इलाके के अखिल महार बंधू-भगिनियों से आग्रह के साथ विनती की जाती है, कि वे आपसी, निजी मतभेद भुला कर, एक साथ इस समारोह में भाग लेकर परिषद को सफल बनाएं।
विशेष सूचना - परिषद के लिए चंदा अथवा दान देना हो तो अथवा कुछ सूचना या अन्य पत्राचार करना हो तो यहां दिए जा रहे पते पर ही करें -
संयुक्त सचिव - अखिल मुंबई इलाका महार परिषद, दामोदर हॉल, परेल, मुंबई नं. 12 याद रहे : छपी हुई रसीद लिए बगैर चंदा न दें।
आपके विनम्र,
अध्यक्ष : रेवजी दगडूजी डोलस, उपाध्यक्ष : संभाजी तुकाराम गायकवाड,
संयुक्त सचिव : दिवाकर नेवजी पगारे, मारुती विठ्ठल घमरे, चांगदेव नारायण मोहिते।
कोषाध्यक्ष : सुभेदार विश्राम गंगाधर सवादकर ख्1,
- ‘जनता’, 29 फरवरी, 1936