89. ‘मुक्ति कोन पथे?’ - मई 1936 दादर (मुंबई) - Page 491

474 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

के सत्याग्रह की याद में मंडप के दो दरवाजों का नामकरण नासिक दरवाजा और महाड़ दरवाजा किया गया था।

ऐसे नयनमनोहारी और भव्य मंडप में मुंबई इलाका शहर परिषद का अधिवेशन बडे उत्साह के साथ और सफलता से संपन्न हुआ। इस परिषद के अध्यक्ष स्थान पर थे मि. बी. एस. वेंकटराव उर्फ हैदराबाद के अम्बेडकर! इस कारण परिषद काफी प्रसिद्ध रही।

यह परिषद मुंबई इलाके के लिए थी, इसके बावजूद मध्य प्रांत, वर्हाड, इंदौर, महू, हैदराबाद आदि अन्य प्रांतों से प्रमुख नेता इस परिषद के लिए हाजिर थे। मुंबई में अस्पृष्य समाज के महार बांधवों की यह प्रचंड परिषद देख कर स्पृश्य लोगों के दृष्टिकोण में जरूर परिवर्तन आने थे। महार समाज के हर व्यक्ति ने इस परिषद में अपनत्व से हिस्सा लेकर डॉ. अम्बेडकर पर अपना प्रेम व्यक्त किया था। परिषद के लिए आए हजारों महार बंधुओं का अनुशासन तारीफे काबिल था। इस परिषद का पूरा प्रबंधन सुचारू रूप से चलाने के लिए समता सैनिक दल ने जो भूमिका निभाई थी वह विशेष उल्लेखनीय थी।

डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर ने इस परिषद को सफल बनाने के लिए दिन-रात मेहनत की थी। निमंत्रित प्रतिनिधियों को, मेहमानों को किसी तरह की कोई दिक्कत पेश न आए, इसके लिए खास प्रबंधकों ने हर बात का खयाल रखा था। इस सम्मेलन के आयोजन में अस्पृष्य वर्ग के नेता डॉ. पी. जी. सोलंकी ने भी डॉ. अम्बेडकर की

खूब मदद की। इस परिषद में भाग लेने वाले प्रमुख लोगों में थे - मे. भास्करराव जाधव, सेठ शंकरराव परशा, पी. आर. लेले, पी. जी. अभ्यंकर, डॉ. सोलंकी, अमृतराव रणखांबे, भाऊराव गायकवाड़, अॅडवोकेट पाध्ये, बॅ. समर्थ, सौ वत्सलाबाई शेगावकर, सौ. वेदक, सौ. डॉ. चंपूताई प्रधान, देवराव नाईक, अनंतराव चित्रे, बापूसाहेब सहस्त्रबुद्ध े, सुरेंद्रनाथ टिपणीस, नागपुर से मेश्राम, एम. क.े कर्णिक, एल. एन. हरदास, सेठ मनियार आदि।

सोमवार दिनांक 1 जून, 1936 के दिन सुबह डॉ. अम्बेडकर साहब की अध्यक्षता में मुंबई संत समाज की परिषद हुई। उस समय स्वागताध्यक्ष श्री. शंकर नारायणदास बर्वे का प्रभावी भाषण हुआ। अध्यक्ष के नाते डॉ. अम्बेडकर ने जो भाषण दिया, उसके कारण संत समाज के हृदय में हलचल मच गई। जैसे कि पहले ही तय किया गया था, सैंकड़ों संतों ने अपनी दाढ़ी-मूंछ, जटाएं, मालाएं अग्निकुंड में अर्पण कीं। रात डॉ. अम्बेडकर की अध्यक्षता में राजनीतिक परिषद हुई। उस वक्त उन्होंने नए सुधार कैसे लाएं और नए कायदे कौंसिल के चुनाव कैसे लड़ाए जाएं इसके बारे में बेहद प्रभावी भाषण दिया।