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करे, यही ठीक है। जिन कारणों से सभी अस्पृश्य जातियों को एक साथ परिषद लेने की आवश्यकता मुझे महसूस नहीं हुई, उनमें से यह एक प्रमुख वजह है। केवल महारों की ही परिषद बुलाने की एक और वजह भी है। धर्म परिवर्तन की घोषणा के लिए अब आठ-दस माह का समय बीत चुका है। इस दौरान लोकजागृति का ज्यादातर काम हो चुका है। अब जनमत आजमाने का समय आ गया है, ऐसा मुझे लगता है। जनमत परखने का एक सादा और आसान साधन परिषद लेना है, ऐसा मुझे लगता है। धर्म परिवर्तन को प्रत्यक्ष में लाने के लिए जो कोशिशें करना जरूरी हैं, उन पर अमल करने से पहले इस बारे में लोगों का क्या मत है, यह परखना मुझे जरूरी लगता है। मेरा ऐसा भी विचार है कि अस्पृश्यों की सर्वसाधारण सभा बुला कर ली गई राय से विभिन्न जातियों की अलग सभाएं लेकर परखी गई राय, अधिक विश्वास करने लायक होगी। क्योंकि सभी अस्पृश्यों की सभा कह कर बुलाए जाने के बावजूद भी वह सभी अस्पृश्यों की प्रातिनिधिक सभा शायद ही हो पाती। जनमत के बारे में विश्वासपूर्ण तरीके से पता लगाया जा सके इसीलिए महारों की अलग से सभा बुलाई गई। इस सभा में अन्य जातियों को बुलाया नहीं गया, इसलिए उनका नुकसान होने वाला नहीं है। अगर वे धर्म परिवर्तन नहीं करना चाहते तो उन्हें इस सभा में आमंत्रित न किए जाने के बारे में दुखी नहीं होना चाहिए। वे अगर धर्म परिवर्तन करना चाहते हैं, तो इस सभा में बुलाया नहीं गया, इसलिए उनके निर्णय में किसी तरह का कोई अडं़गा नहीं
खड़ा होगा। महार लोगों की जिस तरह की सभा ली जा रही है उसी तरह की सभा हर जाति ले और उसके जरिए अपनी जाति के लोगों का मत आजमाने की कोशिश करें, लोगों को अपना मत व्यक्त करने का अवसर दें। मैं उन सभी जातियों को सूचित करता हूं कि इस काम में उन्हें जिस किसी तरह की मदद की जरूरत होगी, वह देने के लिए मैं तैयार हूं। अब तक जो कुछ भी मैंने कहा, वह केवल विषय की प्रस्तावना हुई। अब मैं आज की सभा के प्रमुख विषय पर आ जाता हूं।
धर्म परिवर्तन का विषय जितना महत्वपूर्ण है उतना ही वह गहन भी है। साधारण व्यक्ति की बुद्धि के लिए उसे समझ पाना थोड़ा कठिन है। उसी तरह साधारण व्यक्ति को इस विषय के बारे में समझाना भी आसान काम नहीं है। तथापि, मैं यह बात जानता हूं कि आप सब लोगों को जब तक यकीन नहीं होगा, तब तक इस बात को व्यवहार में लाना मुश्किल है। इसीलिए, जितने आसान तरीके से इस विषय को आप तक पहुंचाया जा सकता है, उतने ही आसान तरीके से मैं वह करने जा रहा हूं।
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धर्म परिवर्तन के बारे में दो तरह से विचार किया जाना जरूरी है। सामाजिक तथा धार्मिक दृष्टिकोण से विचार करना आवश्यक है। इस पर ऐहिक दृष्टिकोण से