89. ‘मुक्ति कोन पथे?’ - मई 1936 दादर (मुंबई) - Page 501

484 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

है। पैसा सबको चाहिए। जो धर्म ये बातें भूलता है, जो धर्म एक को सज्ञान बनाने के लिए बाकियों को अज्ञान में रखता है वह धर्म नहीं है, वह लोगों को बौद्धिक गुलामी में रखने का षड्यंत्र है। जो धर्म एक के हाथ में शस्त्र देकर बाकियों को निःशस्त्र करता है, वह धर्म नहीं वह तो एक के द्वारा दूसरे को गुलामी में रखने का उपाय भर है। जो धर्म कुछ लोगों के लिए धन कमाने की राह खोल देता है और बाकियों को अपनी जरूरतों के लिए भी औरों पर निर्भर रहने की अनुज्ञा देता है, वह धर्म नहीं स्वार्थपरायणता है। हिंदू धर्म का चातुर्वर्ण्य इस तरह का है। उसके बारे में मेरी अपनी जो राय है, उसे मैंने आपके सामने साफ-साफ शब्दों में रखा है। यह हिंदू धर्म क्या आपका हित करेगा? आप खुद सोच कर देखिए। व्यक्ति की आत्मोन्नति के लिए योग्य वातावरण पैदा करना, अगर धर्म की मूलभूत संकल्पना है, ऐसा मान लिया जाए तो हिंदू धर्म में आपकी आत्मोन्नति कभी नहीं हो सकती। व्यक्ति के विकास के लिए तीन बातें जरूरी होती हैं। सहानुभूति, समता और आजादी। इनमें से एकाध भी हिंदू धर्म में आपके लिए उपलब्ध है, ऐसा क्या आप कह सकते हैं?

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हिंदू धर्म में आपके प्रति क्या सहानुभूति है?

सहानुभूति के बारे में सब केवल शून्य ही है, ऐसा ही कहना पडे़गा। आप कहीं भी जाइए, आपकी तरफ कोई भी अपनत्व से नहीं देखेगा। आप इस बारे में अनुभव कर ही चुके हैं। अपनत्व की भावना बिल्कुल नहीं और हिंदू आपको परायों से भी गैर मानते हैं। एक ही गांव में रहने वाले स्पृश्य और अस्पृश्य के बीच का नाता पड़ोस में रहने वाले भाइयों के आपसी रिश्ते जैसा कभी भी नहीं होता। दो परस्परविरोधी सेना के गुटों की छावनियों जैसा माहौल होता है। हिंदुओं को मुसलमान जितने करीबी लगते हैं, उनके साथ उनका जितना स्नेहभाव होता है, उसका शतांश भी आपके प्रति नहीं होता। लोकल बोर्ड में कायदे कौंसिल में, व्यापार में हिंदू-मुसलमान एक-दूसरे का सहारा बन कर रहते हैं। लेकिन क्या आप एकाध उदाहरण भी ऐसा दे पाएंगे कि जब हिंदुओं ने आपके साथ सहानुभूतिपू्र्ण व्यवहार किया हो? उल्टे यह बात सच है कि वे हमेशा आपके खिलाफ होते हैं। आपमें से जिनको न्याय की गुहार लगाते हुए कोर्ट जाना पड़ा हो, या पुलिस की सहायता लेनी पड़ी हो, वे बता सकते हैं कि हिंदुओं के मन में आपके खिलाफ जो भावना है, वह कितना घातक रूप धारण कर चुकी है। कोर्ट में न्याय मिलेगा, पुलिस मदद करेगी क्या ऐसा आपमें से किसी एक को भी विश्वास है? अगर नहीं, तो आपको विश्वास न महसूस होने के पीछे वजह क्या है? मेरे मत में ऐसे अविश्वास की एक ही वजह है। और वह यही कि हिंदू लोगों के बीच आपके बारे में किसी तरह की कोई सहानुभूति न होने के कारण वे अपने अधिकारों का अच्छा इस्तेमाल करेंगे, ऐसा आपको नहीं लगता। अगर यह सच है, तो फिर शत्रुता भरे इस वातावरण में रहने से आपको क्या हासिल होना है?