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तो मुसलमान धर्म में और ईसाई धर्म में भी श्रेष्ठ-कनिष्ठ, ऊंच-नीच जैसा भेदभाव जगाने वाली सीख नहीं दी जाती। इसके बावजूद वे लोग आपको निचले दर्जे का मानते हैं। इसकी वजह क्या है? इसकी वजह एक ही है। हिंदू लोग आपको निचले दर्जे का समझते हैं इसलिए मुसलमान और ईसाई लोग भी आपको निचले दर्जे का समझते हैं। अस्पृश्यों को अगर हम अपने समान समझने लगे, तो हिंदू लोग हमें अस्पृश्यों के जितना ही नीचे समझेंगे, इस डर से मुसलमान और ईसाई लोग आपके साथ हिंदुओं की तरह ही अस्पृश्यता का व्यवहार करते हैं। हम हिंदू समाज में हीन करार दिए गए हैं। इतना ही नहीं वरन् हिंदुओं के द्वारा दिए जाने वाले असमान बर्ताव के कारण हम पूरे भारत देश में सबसे कनिष्ठ माने गए हैं। अपमान की इस स्थिति को टालने के लिए, इस कलंक को धो डालने के लिए, नरदेह को सार्थक करने के लिए अगर कोई उपाय है, तो वह एकमात्र उपाय है कि हिंदू धर्म का और हिंदू समाज का त्याग करें।
हिंदू धर्म में क्या आप स्वतंत्र हैं?
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कुछ लोग कहेंगे कि हर नागरिक को कानूनन जितनी व्यवसाय की स्वतंत्रता है, उतनी ही व्यवसाय की स्वतंत्रता आपको भी है, हर व्यक्ति को जितनी व्यक्तिगत स्वतंत्रता है उतनी आपको भी है। लेकिन उनके इस कथन में कहां तक सच्चाई है, यह आप लोगों को गहराई से सोचना होगा। जिसे समाज विरासत में मिले व्यवसाय से अलग कोई व्यवसाय करने नहीं देता, उसे यह बताने का क्या मतलब है कि तुम्हें व्यवसाय की स्वतंत्रता है? जिसके लिए संपिŸा कमाने का कोई रास्ता खुला नहीं है, उसे यह बताने से क्या हासिल कि तुम्हारी संपिŸा को कोई छुएगा भी नहीं, अपनी संपिŸा को भोगने के लिए तुम आजाद हो? पैदाइशी अपवित्रता के कारण जिसे कोई नौकरी नहीं मिल पाती, जिसके मातहत काम करना लोगों को अपना अपमान लगता है, ऐसे व्यक्ति से यह कहना कि तुम्हे कोई भी नौकरी करने का अधिकार है, असल में उसका मजाक उड़ाना ही है। कानून ने उसे कई अधिकार दिए होंगे, लेकिन अगर समाज उसे उन अधिकारों का उपभोग करने दे, तभी उन्हें अधिकार कहा जा सकता है। अस्पृश्य अच्छे कपडे पहन कर घूम सकते हैं, यह अधिकार कानून ने उन्हें दिया है, लेकिन हिंदू समाज उन्हें वैसे कपडे़ पहनने नहीं देता, तो फिर उस अधिकार का क्या मतलब है? तांबा और पीतल के बर्तनों में पानी रखने का, भरने का, लाने का अधिकार अस्पृश्यों को कानून ने दिया है, लेकिन हिंदू समाज अस्पृश्यों को धातू के बर्तन इस्तेमाल नहीं करने देता, तो फिर उस अधिकार से उन्हें क्या हासिल? कानून उन्हें अधिकार देता है कि वे अपने घरों पर खपरैलें बिछाएं, लेकिन हिंदू समाज उसे
खपरैलें डालने नहीं देता, तो उसे प्राप्त अधिकार का क्या मतलब है? ऐसे कई सारे