89. ‘मुक्ति कोन पथे?’ - मई 1936 दादर (मुंबई) - Page 505

488 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

उदाहरण दिए जा सकते हैं। सारांश कि, वे उसी अधिकार को अपना मान सकते हैं, जिस पर अमल करने की समाज उन्हें इजाजत देता है। कानून से अधिकार प्राप्त होने के बावजूद अगर समांज अडं़गा खड़ा करे, तो उस अधिकार के कोई मायने नहीं रह जाते। अस्पृष्य लोगों को कानूनी आजादी से अधिक सामाजिक आजादी की ज्यादा जरूरत है। जब तक सामाजिक स्वतंत्रता प्राप्त नहीं होती, तब तक कानून आपको भले कितनी ही आजादी दे, उसका कोई मतलब नहीं। कुछ लोग कहेंगे कि तुम्हें शारीरिक स्वतंत्रता प्राप्त है, तुम्हें जहां कानूनन मनाही ना हो, वहां जाया जा सकता है, कानूनन मनाही ना हो, वह बात आप खुले आम कह सकते हो। किन्तु इस तरह की आजादी का क्या मतलब। मानव के पास शरीर है, उसी तरह मन भी है। व्यक्ति को जितनी शारीरिक स्वतंत्रता की आवश्यकता है उतनी ही मानसिक आजादी की भी आवश्यकता होती है। केवल शारीरिक आजादी के कोई मायने नहीं। मानसिक आजादी ज्यादा महत्वपूर्ण है। शारीरिक आजादी किसलिए दी जाती है? इसलिए कि आप मनमाफिक व्यवहार कर सकें। कैदी के पैर की जंजीरें खोल कर उसे आजाद करने का मतलब क्या है? मतलब यही है कि वह दुनिया भर में घूम कर अपनी काबिलियत का फायदा उठाए। लेकिन जिस व्यक्ति का मन आजाद नहीं है उसके लिए इस तरह की बाहरी आजादी का क्या फायदा? मानसिक स्वतंत्रता ही सच्ची आजादी है। जिसका मन आजाद नहीं वह खुला (मुक्त) होकर भी गुलाम है। जिसका मन आजाद नहीं, वह कैदी भले न हो, लेकिन वह जेल में है। जिसका मन आजाद नहीं, वह जिंदा रह कर भी मरा हुआ है। मन की आजादी, व्यक्ति के जिंदा होने की निशानी है। लेकिन आपकी मानसिक स्वतंत्रता खत्म नहीं हुई है। आप मानसिक रूप से स्वतंत्र हैं, इसका क्या सबूत है? किसके पास मानसिक आजादी है, ऐसा कहा जा सकता है? जो अपनी बुद्धि जाग्रत रख कर अपने क्या हक हैं, अपने अधिकार क्या हैं, और अपने कर्त्तव्य क्या हैं, यह जान लेता है, उसे ही मैं आजाद इन्सान कह सकता हूं। जो हालात का गुलाम नहीं बना, जो हालात पर काबू पाने के लिए हमेशा तैयार रहता है, वही आदमी आजाद होता है, ऐसा मैं समझता हूं। जो स्थितियों का दास नहीं हुआ, स्थितियों पर जो काबू पाने के लिए हमेशा तैयार रहता है, वही आदमी आजाद है, ऐसा मैं कहता हूं। जो रूढि़यों के आधीन नहीं हुआ, जो गतानुगतिक नहीं बना, उसके विचारों की ज्योति बुझी नहीं, वही स्वतंत्र है, यह मेरा कहना है। जो दूसरों के वश में नहीं होता, जो दूसरों की सुनाकर अपने निर्णय नहीं लेता, जो कार्य कारण भाव समझने के बाद ही किसी बात पर विश्वास करता है, जो अपने अधिकारों के प्रति जागरुक होता है, जो प्रतिकूल मत से डरता नहीं, किसी और के हाथ की कठपुतली नहीं बनने जितनी बुद्धि, स्वाभिमान जिसके पास है, वही आदमी आजाद है, ऐसा मेरा मानना है। जो अपनी जिंदगी का उद्देश्य और अपने जीवन को किस तरह व्यतीत करना है, यह किसी और की आज्ञानुसार तय