492 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
तरह एक दूसरे से अलग हैं, उसी तरह धर्म परिवर्तन के बाद भी अलग ही रहेंगे। धर्म परिवर्तन के कारण नया कुछ भी नहीं होने वाला है। यह यदि सच है, तो फिर मेरी समझ में एक बात नहीं आती, कि धर्म परिवर्तन के बारे में लोगों को कठिन क्या लगता है? दूसरी बात यह कि, धर्म परिवर्तन की बात भले आपको सही ना लगी हो, नामांतरण का महत्व आप सब लोग जान गए हैं, उससे आप सहमत हैं, इस बारे में कोई दो राय नहीं है। आपमें से किसी को भी जब यह पूछा जाता है कि तुम्हारी जाति क्या है? तब वह बताता है चोखामेला, हरिजन वगैरा। लेकिन वह महार नहीं बताता। नामांतरण की जरूरत ना हो तो कोई नामांतरण नहीं करेगा। इस तरह नामांतरण करने की वजह साफ है। अपरिचित व्यक्ति को यह पता नहीं चलेगा कि स्पृश्य कौन है और अस्पृश्य कौन है, और जब तक जाति का पता नहीं चलता, तब तक स्पृश्य हिंदुओं के मन में किसी भी प्रकार की दूषित भावना उत्पन्न नहीं होगी। यात्रा के दौरान स्पृश्य और अस्पृश्य बंधुभाव से व्यवहार करते हैं। एक-दूसरे से पान-बीड़ी या फलों का लेनदेन होता है, लेकिन उसी व्यक्ति को अगर जाति का पता चले, और पता चले कि वह जाति अस्पृश्यों में गिनी जाती है, तो उसके मन में तिरस्कार उत्पन्न होता है। उसे गुस्सा आता है, अपने को धोखा दिया गया इस बात से उसे गुस्सा आता है। फिर यात्रा के दौरान बनी दोस्ती का हश्र गालीगलौज और मारपीट में होता है। यकीनन कइयों को इस बात का अनुभव होगा। ऐसा क्यों होता है, यह आप सब जानते हैं। आपको जो जातिवाचक नाम मिले हैं उनसे अब इतनी दुर्गंध आती है कि उसके उच्चारण मात्र से स्पृश्य लोगों को मितली होती है। और इसीलिए आप लोग अपने को महार न कहलाते हुए, चोखामेला कह कर लोगों को धोखा देने की कोशिश करते हैं! लेकिन लोग धोखा नहीं खाते। इस बात का भी आपको अनुभव है। क्योंकि चोखामेला कहिए या हरिजन कहिए लोगों को सच्चाई का पता चल ही जाता है! आपको नामांतरण की जरुरत है, यह आपने अपनी कृति से साबित किया है। मैं आपसे बस इतना ही पूछना चाहता हूं कि अगर नामांतरण की आपको इतनी जरूरत लगती है, तो फिर धर्म परिवर्तन में आपको क्या ऐतराज हो सकता है? धर्म परिवर्तन एक तरह से नामांतरण ही है। धर्म परिवर्तन के साथ होने वाला नामांतरण आपके लिए ज्यादा फायदेमंद रहेगा। मुसलमान या ईसाई या बौद्ध कहलाना, सिक्ख कहलाना ज्यादा फायदेमंद रहेगा। मुसलमान, या ईसाई या बौद्ध कहलाना, सिक्ख कहलाना धर्मांतरण तो है ही, नामांतरण भी है। वह सच्चा नामांतरण है। इस नामांतरण में दुर्गंध नहीं है। यह नामांतरण आमूलाग्र है। इसके बारे में कोई अता-पता नहीं लगा सकता। लेकिन चोखामेला, हरिजन जैसे नामांतरण का कोई मतलब नहीं। पुराने नाम की गंद नए नाम से जुड़ जाएगी। जब तक आप हिंदू धर्म में हैं, तब तक आपको नामांतर करना ही पडे़गा। क्योंकि आप अपने को केवल हिंदू नहीं कहला सकते। हिंदू कोई मनुष्य प्राणी है, यह कोई पहचानता नहीं। महार कह