89. ‘मुक्ति कोन पथे?’ - मई 1936 दादर (मुंबई) - Page 517

500 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

पहले धर्म परिवर्तन और बाद में आर्थिक उन्नति या फिर पहले आर्थिक उन्नति और बाद में धर्म परिवर्तन का विवाद पहले राजनीतिक उन्नति या पहले सामाजिक उन्नति के विवाद जैसा बिल्कुल नीरस है। सामाजिक उन्नति के लिए कई साधनों की जरूरत होती है। और वे सभी अपने-अपने तरीके से उन्नति के आवश्यक अंग ही होते हैं। उनमें से फलां का प्रयोग पहले करना है, और फलां का बाद में करना है, इस तरह हमेशा अनुक्रम नहीं लगाया जा सकता। लेकिन अगर इसी तरह का अनुक्रम रखना हो तो, ‘पहले धर्म परिवर्तन या पहले आर्थिक उन्नति?’ इस सवाल का जवाब देना हो तो मैं धर्म परिवर्तन को ही अग्रक्रम देना चाहूंगा। जब तक आप पर अस्पृश्यता का कलंक लगा हुआ है तब तक आपकी आर्थिक उन्नति कैसे हो पाएगी, यह मेरी समझ में नहीं आ रहा। आपमें से किसी ने अगर कोई दुकान खोली तो जब इस बात का पता चलेगा कि दुकानदार अस्पृश्य है तो कोई आपकी दुकान से माल नहीं

खरीदेगा। नौकरी पाने के लिए अगर आपमें से किसी ने अर्जी दी और पता चला कि उम्मीदवार अस्पृश्य है, तो आपको नौकरी नहीं मिलेगी। अगर किसी की खेती की जमीन बेचनी हो और आपको पता चले, आप खरीदना चाहें और बेचने वाले को पता चले कि आप अस्पृश्य हैं, तो वह आपको अपनी जमीन बेचेगा नहीं। आप कोई भी मार्ग भले चुन लीजिए, लेकिन अस्पृश्य होने के नाते उनमें से किसी मार्ग पर चल कर आपकी आर्थिक उन्नति नहीं होगी। अस्पृश्यता हमेशा आपकी उन्नति की राह का अडं़गा बनी रहेगी। उसे हटाए बगैर आपकी राह आसान नहीं होने वाली। धर्म परिवर्तन के बगैर उसे हटाना संभव नहीं। आपमें कुछ युवक आजकल शिक्षा के क्षेत्र में भाग्य आजमाना चाहते हैं। उसके लिए जहां कहीं से भी हो सके, वे रुपयों का बंदोबस्त करना चाहते हैं। इन पैसों के लालच के कारण जहां हैं, वहीं रह कर उन्नति करने के बारे में आप सोच रहे हैं। लेकिन ऐसे युवकों से मैं पूछना चाहता हूं कि, अगर शिक्षा लेने के बाद उसके अनुकूल नौकरी पाने की अगर कोई तजवीज नहीं है तो फिर केवल शिक्षा पाकर क्या होगा? आप शिक्षा लेकर क्या करेंगे? हममें से जो पढ़े-लिखे लोग हैं उनमें से कई लोग तो बेकार हैं, उनके पास कोई काम नहीं है। ऐसी शिक्षा का आप करेंगे क्या? मेरे मत में, इस बेकारी की बड़ी वजह अस्पृश्यता ही है। अस्पृश्यता के कारण ही आपके गुणों की कदर नहीं होती। अस्पृश्यता के कारण आपकी योग्यता बेकार चली जाती है। अस्पृश्यता के कारण आपको सेना से निकाल दिया जाता है। अस्पृश्यता के कारण आपको पुलिस में नहीं लिया जाता। अस्पृश्यता के कारण ही आप चपरासी की जगह नहीं पा सकते। अस्पृश्यता के कारण ही आप ऊंचे पदों तक पहुंच नहीं सकते। अस्पृश्यता एक शाप है। उससे आप पीडि़त हैं। उसके कारण आपकी योग्यता भस्म हो चुकी है। ऐसी हालत में आप गुणसंपादन कैसे करेंगे? और यदि किया भी तो उससे फायदा क्या होगा? आपको अगर लगता है कि, अपने गुणों का सही सम्मान हो, अपनी शिक्षा का