503
का आप क्या जवाब देंगे, इस बारे में भी आपको सोचना होगा। मुसलमान लोग, ईसाई लोग बड़ी आसानी से इसका जवाब दे सकते हैं। वे कहेंगे, हमारा समाज दरिद्री है, अज्ञानी है, पिछड़ा है, इसलिए हमें अलग राजनीतिक अधिकार नहीं दिए गए हैं। हमें ये अधिकार मिले हैं, क्योंकि हमारा धर्म अलग है, हमारा समाज अलग है, और जब तक हमारा धर्म अलग है तब तक हमें अपना राजनीतिक अधिकार मिलना चाहिए। आप जब तक हिंदू धर्म में हैं, तब तक इस तरह का रुख अपना नहीं सकते हैं। जिस दिन आप धर्म परिवर्तन करके हिंदू धर्म से अलग हो जाएंगे, तब आप इस तरह का रुख अपना सकते हैं, तब तक नहीं। जब तक आप इस तरह अलग खडे़ होकर अपने अधिकारों की मांग नहीं कर सकते, तब तक आपके अधिकार सुरक्षित रहेंगे, इसका भी कोई भरोसा नहीं है। अपने राजनीतिक अधिकारों को शाश्वत मान कर चलना, अज्ञानता का लक्षण है। इस दृष्टि से देखा जाए तो धर्म परिवर्तन राजनीतिक अधिकारों के विरोधी न होकर उनके संवर्द्धन का ही वह एक हिस्सा है, ऐसा माना जा सकता है।
आप हिंदू धर्म में रहेंगे, तो आपके राजनीतिक अधिकार जाएंगे। राजनीतिक अधिकारों को बचाना हो तो धर्म परिवर्तन कीजिए। धर्म परिवर्तन से वे कायम रहेंगे।
| mi | lag | kj |
|---|
मैंने अपना मन बना लिया है। यह पक्का है कि मैं धर्म परिवर्तन करने वाला हूं। मेरा धर्म परिवर्तन किसी भी प्रकार के ऐहिक लाभ के लिए नहीं है। अस्पृश्य रहते हुए प्राप्त नहीं की जा सके, ऐसी कोई बात नहीं है। मेरे धर्म परिवर्तन की जड़ में आध्यात्मिक भावना के अलावा कोई अन्य भावना नहीं। हिंदू धर्म मेरी बुद्धि की कसौटी पर खरा नहीं उतरता। हिंदू धर्म मेरे स्वाभिमान को रास नहीं आता। लेकिन आप लोगों को आध्यात्मिक लाभ के साथ ऐहिक लाभ के लिए भी धर्म परिवर्तन करना जरूरी है। कुछ लोग ऐहिक लाभों के लिए धर्म परिवर्तन करने की कल्पना पर हंसते हैं, और उसका उपहास करते हैं। ऐसे लोगों को मूर्ख कहने में मुझे किसी तरह का संकोच महसूस नहीं होता। मरने के बाद आत्मा का क्या होगा यह बताने वाला धर्म हो सकता है, अमीरों के काम की चीज हो। खाली समय में ऐसे धर्म के बारे में सोच कर वे अपना मनोरंजन कर सकते हैं। जिंदा रहते हुए जिन्होंने सुख भोगा, उन्हें इस बात की फिकर होना स्वाभाविक है कि मरने के बाद भी उन्हें सुख मिलता रहे और जिसमें इस बारे में बताया जाता है, वही धर्म उन्हें श्रेष्ठ लगे। यह बिल्कुल स्वाभाविक है। लेकिन किसी धर्म में रह कर जो बिल्कुल राख बनते आए हैं, जो अन्न और वस्त्र तक से वंचित हैं, जिनके प्रति लोगों की इंसानियत गायब हो गई