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इंग्लैंड की संसद के साथ लड़ रहे थे, उनमें उग्र मानी गई राजनीतिक पार्टी का नेता था, चार्ल्स जेम्स फोक्स। इस पार्टी ने सभी नागरिकों को मतदाता अधिकार दिलाने के लिए जोरदार कोशिश की। उस समय संसद में धनिकों का वर्चस्व था। धनिकों की उस संसद के साथ चार्ल्स जेम्स फोक्स और उसके अनुयायी कड़ाई से झगडे़, लेकिन उसमें उन्हें असफलता ही मिली। एक आखिरी कोशिश के तौर पर उसने तथा उसके पार्टी ने पार्लियामेंट के साथ असहयोग किया। भारत में जिस तरह महात्मा गांधी का असहयोग आंदोलन चल रहा था उसी तरह इंग्लैंड में भी उस दौरान असहयोग आंदोलन बड़े जोरों से चल रहा था। उग्र पक्ष की नेता थीं लेडी पार्टलैंड। इस महिला ने जब सुना कि जेम्स चार्ल्स फॉक्स ने संसद से बहिर्गमन किया तब उसने उसे अपने घर चाय पीने के लिए बुलाया। फोक्स और उसके सहयोगी जब उस महिला के घर चाय पीने पहुंचे तब वे आपस में हो रही बातचीत में अपने असहयोग आंदोलन की शेखी बघारने लगे। उस वक्त उस महिला ने उन लोगों से जो सवाल किया वह काफी महत्वपूर्ण होने के नाते मैं आपको बता रहा हूं। उस महिला ने कहा, ‘मि. चार्ल्स, आपकी असहकारिता से अगर आपका दुश्मन चित हो रहा हो, तो आपकी राह सही है। लेकिन अगर ऐसा नहीं हुआ तो इस असहयोग का कोई मतलब नहीं। प्रतिपक्ष के साथ लड़ाई करने के बजाय अगर आप हार के कारण रोते बैठे और डरपोक की तरह मैदान छोड़ कर भाग गए तो आपका दुश्मन आप पर जीत हासिल किए बगैर नहीं रहने वाला और इसीलिए, युद्ध का मैदान छोड़ जाना पागलपन ही है।’ मुझे लगता है यही समीक्षा काँग्रेस पर भी लागू होती है।
हमें दो राजनीतिक सुधार मिले हैं। वे भले अधूरे हों उन्हें नकारने की बजाए बगैर उन पर अमल करते हुए हम और भी बहुत कुछ प्राप्त कर सकते हैं। मिले हुए सुधारों के जरिए हम और बहुत कुछ पा सकते हैं। कोई भी बात कानून बने बगैर नहीं पाई जा सकती। इसलिए उसके बारे में कानून बनना ही चाहिए। कम से कम अस्पृश्य लोगों का भविष्य कानून पर ही निर्भर रहने वाला है। इसीलिए आपको ये राजनीतिक सुधार स्वीकारना अनिवार्य है।
हमारे सामाजिक सुधार कानून बना कर नहीं होंगे। लेकिन हमारी आर्थिक, शैक्षिक और औद्योगिक उन्नति कानून के जरिए पायी जा सकती है। आपको उन्हीं पर निर्भर करना चाहिए। अपनी उन्नति के कानून कैसे बनेंगे यह उस बात पर निर्भर करेगा कि आप विधिमंडल में किस तरह के सदस्यों को चुन कर भेजते हैं। हम जिस तरह के प्रतिनिधि चुन कर भेजेंगे, वे हमारे समाज के हित का खयाल रखने वाले हैं अथवा नहीं, इस बात का हमें ध्यान रखना होगा। अपने समाज के हित में विधिमंडल में कानून बनाएंगे, ऐसे ही लोगों को आप चुन कर भेजें। अब तक हमें अंग्रेज सरकार से दाद मांगनी पड़ती थी। लेकिन इस नए कानून के मुताबिक अब