516 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
अंग्रेज सरकार के हाथ में कुछ नहीं बचा।
आप जिन प्रतिनिधियों को चुन कर विधिमंडल भेजेंगे, आपको उन्हीं पर निर्भर रहना होगा। आपको जिन बातों की कमी खलती है, उसे दूर करने के लिए आपको उन्हें मजबूर करना होगा। केवल प्रतिनिधियों को विधिमंडल भेजना काफी नहीं होगा। चुन कर जाने के बाद वे क्या करते हैं इस पर भी आपको ध्यान रखना होगा। मैं बार-बार आपसे कहना चाहूंगा कि आप जिस आदमी को विधिमंडल में भेजेंगे वह काबिल होना चाहिए। आप लोग भोले हैं। एक कहेगा - यह मेरे गांव का यशा महार है। दूसरा कहेगा - यह मेरे गांव का रामा महार है। तीसरा कहेगा - मेरा शंकर महार चुनकर आना चाहिए। आपके मन में इस तरह का अभिमान क्यों हो? विधिमंडल में आपका हित कौन करेगा, यही मुख्यतः आपको देखना होगा, बिनावजह गांव का, तहसील का, जिले का अभिमान लेकर ना बैठें।
उम्मीदवार को चुनते समय अगर आपने ध्यान नहीं रखा तो आपके पूरे काम का ही नाश होना तय है। एक और बात जो मुझे आपको बतानी है, वह यह कि अकेला आदमी विधिमंडल में कुछ नहीं कर सकता। मैं 1926 साल से मुंबई विधिमंडल में हूं, मेरे पास थोड़ा बहुत ज्ञान भी है। लेकिन समाज के हित में मैं कोई कार्य कर नहीं पाया। इसकी वजह है - मैं और डॉ. सोलंकी हम केवल दो ही लोग विधिमंडल में हैं, और एक दो लोगों की विधिमंडल में कुछ चलती नहीं। आप जिन प्रतिनिधियों को चुन कर भेजते हैं, वे एकता से, मिल-जुल कर, संगठित तरीके से कार्य करते हैं या नहीं, यह देखना आपका काम है। पार्टी के अनुसार जो नहीं चलते, उन लोगों को चुन कर आपका हित नहीं होगा। उसका केवल बुद्धिमान होना भी काफी नहीं है। उसकी सोच क्या है, उसका कोई पक्ष भी है, इस बारे में आपको जागरुक रहना होगा।
सौभाग्य से हमें पंद्रह सीटें मिली हैं। लेकिन जो पंद्रह जगहें हमें मिली हैं, वे पंद्रह प्रतिनिधि अगर मिल-जुल कर नहीं रहे, तो यही मानना होगा कि उन सीटों का एक तरह से बुरा इस्तेमाल हुआ। इसीलिए, हमने जिन प्रतिनिधियों को चुन कर दिया है, वे विधिमंडल में एकजुट रहेंगे, इसकी हमें कोई योजना बनानी होगी। और वह योजना इस प्रकार होनी चाहिए कि जिसके कारण ये पंद्रह उम्मीदवार पांच सालों तक विधिमंडल में न सिर्फ एकजुट होकर काम करेंगे, बल्कि समाज के हित का काम करेंगे। समाज के हित से उनका ध्यान बंटेगा नहीं। जिन-जिन जिलों में अपने लिए सीटें रखी गई हैं, उन-उन जिलों में दस-दस लोगों की एक कमेटी बनाई जाए। अलग-अलग जिलों में इस तरह कमेटियों की स्थापना हुई तो इन सभी लोगों में से जो भी लायक लोग होंगे उन सबके एक केंद्रीय मंडल की स्थापना करनी होगी