92. धर्म परिवर्तन से अस्पृश्यों को समानता का अधिकार प्राप्त होगा - जून 1936 मुंबई - Page 536

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(ब) परिषद इस बात की घोषणा करती है कि, अखिल अस्पृश्य समाज के इकलौते नेता डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर पर मातंग समाज को पूरा भरोसा है और उनके साथ मातंग समाज सामूहिक रूप से धर्म परिवर्तन करने के लिए तैयार है।

प्रस्ताव रखा - केरू रामचंद्र जाधव (सोलापुर),

समर्थन दिया - सीमा राम बाबाजी लांडगे (पुणे), आर. एस. फालके (मुंबई), कु. शांताबाई श्रावण सकाटे (मुंबई), रामचंद्र पुनाजी सकट (दौंड), बालकृष्ण बडेकर (सातारा), किसन भाऊराव वाघमारे (अहमदनगर)।

प्रस्ताव 2 - मुंबई इलाके के शहरों में जो पुलिस विभाग हैं, उनकी तरफ से थालियां पीटते हुए जो ढिंढोरा पीटा जाता है, उस काम के लिए मातंग जाति का आदमी काम पर रखें। साथ ही परिषद सरकार से विनति करती है कि गांव-गांव में जाकर ढिंढोरा पीटने के काम का कोई वेतन नहीं दिया जाता, इसलिए ढिंढोरा पीटने वाले को भरपूर वेतन दिया जाए।

प्रस्ताव रखा - के. एस. सकाटे, अनुमोदन दिया - के. एम. कालोखे

प्रस्ताव 3 - मुंबई इलाके में बुवाई के काम आने वाली फॉरेस्ट की जमीनें हम मातंग समाज को तय समय के लिए बिना लगान के फसल उगाने के लिए दें और मियाद के बाद जितना उत्पादन होगा उसका एक चौथाई लगान लें।

प्रस्ताव रखा - के. एम. कालोके

अनुमोदन दिया - शंकरबुवा सकाटे, बाबुराव रामा कांबले, डी. सी. वायदंडे, के. जी. कुचेकर, मारूती ज्ञानू तुपसौंदर।

प्रस्ताव 4 - यह परिषद सरकार से प्रार्थना करती है कि मातंग समाज में जिन-जिन के पास प्रमाणपत्र होंगे, उनके प्रमाणपत्र तथा हाजिरी को बंद कर इस जाति को अपराधियों की जाति सूची से हटा दिया जाए।

प्रस्ताव रखा - सीमाराम बाबाजी लांडगे (पुणे)

अनुमोदन दिया - के. एम. कालोखे, एस. के. देशमुख, बाबूराव दौलतराव गयकवाड़

प्रस्ताव 5 - परिषद सरकार से प्रार्थना करती है कि मुंबई इलाके के सरकारी विभागों में मातंग जाति के लोगों को चपरासी से लेकर उच्चाधिकारी तक के पदों पर तैनात किया जाए।