92. धर्म परिवर्तन से अस्पृश्यों को समानता का अधिकार प्राप्त होगा - जून 1936 मुंबई - Page 537

520 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

प्रस्ताव रखा - एस. के. देशमुख।

अनुमोदन दिया - केरू रामचंद्र जाधव

प्रस्ताव 6 - इस परिषद द्वारा मातंग समाज के रूढि़प्रिय भाई-बहनों को चेतावनी दी जाती है कि ग्रहण अमावस्या के समय भिक्षा मांगने तथा ऐसी अन्य कई पुरानी अनिष्ट रूढि़यों को तुरंत बंद कर दें। समाज के नाम पर बट्टा लगाने वाली इन रूढि़यों का त्याग नहीं करने वाले भाई-बहनों के बुरे बर्ताव के बारे में मातंग समाज को सोचना पडे़गा।

प्रस्ताव रखा - अध्यक्ष ने।

प्रस्ताव 7 - परिषद सरकार से विनती करती है कि नगर जिले के लोकल बोर्ड में मातंग समाज का नॉमिनेटेड मेंबर हो।

प्रस्ताव रखा - अध्यक्ष ने।

प्रस्ताव 8 - मातंग समाज में शिक्षा के प्रसार के लिए छात्रावासों की बहुत जरूरत है। इसीलिए, इस काम के लिए एक केंद्रीय मंडल की स्थापना कर छात्रावास

खोलने के काम में समाज उनकी मदद करे। साथ ही मातंग छात्र हितचिंतक मंडल, मुंबई को भी आर्थिक सहायता दें।

प्रस्ताव रखा - डी. सी. वायदंडे

अनुमोदन दिया - के. जी. कुचेकर, पांडुरंग नाना बडेकर।

इसके बाद डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर का भाषण हुआ। उन्होंने अपने भाषण में कहा,

”भाइयों,

आप लोगों ने धर्म परिवर्तन का जो प्रस्ताव अभी-अभी पारित किया उसके लिए मैं आपका अभिनंदन करता हूं। आपने यह प्रस्ताव पारित किया इसके लिए मुझे खुशी होना स्वाभाविक है। धर्म परिवर्तन की घोषणा किसी एक जाति के लिए न होकर पूरे अस्पृश्य समाज के लिए है। अस्पृष्यों की जितनी जातियां धर्मांतरण के अनुकूल होंगी उतना अच्छा ही है। इसके बावजूद मैं धर्म परिवर्तन के बारे में आपके सामने कुछ बोलना नहीं चाहता। धर्मांतरण के बारे में अच्छे-बुरे के बारे में सोचते हुए जो कुछ कहना था, वह सब महार सभा में मैंने कहा है। वही बात फिर से दोहराने की मुझे कोई जरूरत नहीं लगती। दूसरी बात यह है कि धर्म परिवर्तन का प्रस्ताव आप