92. धर्म परिवर्तन से अस्पृश्यों को समानता का अधिकार प्राप्त होगा - जून 1936 मुंबई - Page 542

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उनके लिए वहां के दरवाजे खुलवा दिए हैं। लेकिन इन सहूलियतों का फायदा किसे पहुंचा? इस सुविधा का फायदा महारों को नहीं मिला, बस चमारों को और मांगों को मिला है। आज पुलिस महकमें में जो दो इन्स्पेक्टर नौकरी करने लगे हैं, उनमें से एक चमार है और एक मांग है। महारों के उम्मीदवार इन दोनों से कई गुना मेधावी और लायक थे। लेकिन उनमें से एक को भी लिया नहीं गया। उल्टे महारों के जो उम्मीदवार कमेटी के सामने परीक्षा के लिए गए, उन उम्मीदवारों को उनकी योग्यता के बारे में सवाल पूछना छोड़ कर यही पूछा गया कि आपने कितने कुओं को भ्रष्ट किया? क्या आप अस्पृश्यों के आंदोलन में हिस्सा लेते हैं? आदि सवाल पूछ कर उन्हें चलता कर दिया गया। तथापि, महारों ने किसी भी तरह की शिकायत नहीं की कि हमने संघर्ष किया और फल किसी और को मिला।

जातिभेद के कारण मुंबई के पुलिस विभाग में अस्पृश्यों की भर्ती करने के लिए सरकार तैयार नहीं थी। आज उसी पुलिस विभाग में अस्पृश्य समाज के कई पुलिस नौकरी कर रहे हैं। इस बात के लिए किसने सरकार को मजबूर किया? चमार या मांग लोगों ने क्या कभी इसके लिए कोशिश की थी? जिन्होंने भी कोशिश की, आज उसका फायदा चमार और मांग लोगों को मिल रहा है या नहीं? महार लोग आंदोलन करें और अन्य लोग उसका फायदा उठाएं इसका यह दूसरा उदाहरण है। आज जिला लोकल बोर्ड में, महापालिका में, तहसील लोकल बोर्ड में अस्पृश्यों के कई प्रतिनिधि दिखाई देते हैं। उनमें कई मांग और चमार भी होंगे। ये जगहें पाने के लिए मांग और चमार जातियों ने क्या कोशिशें कीं? ये जगहें पाने का पूरा श्रेय महारों को जाता है। हालांकि, इसका फायदा मांग लोगों ने और चमारों ने भी लिया है। जब-जब लोकल बोर्ड या महापालिका के चुनावों के लिए सिफारिश मांगने मेरे पास लोग आए हैं तब-तब मैंने उनसे कहा है मांगों का अगर बारह आने का आदमी आए तो मैं सोलह आने वाले योग्य महार आदमी को पीछे हटने के लिए कहूंगा। इससे अधिक व्यापक दृष्टिकोण कोई जाति रख पाएगी, ऐसा मुझे नहीं लगता। नए संविधान में मताधिकार की योग्यता के लिए वतनदारी भी एक है। महार लोग वतनदार हैं, इसलिए उन्हें इसका फायदा मिला है, और अन्य जातियों को वह नहीं मिल पाया है। इस बात को बढ़ा-चढ़ा कर कुछ लोग इस प्रकार बता रहे हैं कि मैंने पक्षपात बुद्धि से प्रेरित होकर महारों को फायदा दिलाने की मंशा से जानबूझ कर मताधिकार की योग्यता वाले कोष्ठक में वतनदारी को भी शामिल किया। असल में यह आरोप गलत है। इसमें सच्चाई नहीं है। महार-मांगों के बीच शत्रुता बढ़ाने के उद्देश्य से ही यह आरोप लगाया गया है। मताधिकार के लिए वतनदारी को भी योग्यता में शामिल करने की सूचना मेरी नहीं है। यह प्रांतीय सरकार द्वारा की गई सूचना है। उसके सही-गलत होने की जिम्मेदारी मेरी नहीं है। दूसरी बात यह है