92. धर्म परिवर्तन से अस्पृश्यों को समानता का अधिकार प्राप्त होगा - जून 1936 मुंबई - Page 545

528 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

नहीं है। हमें जाति-भेद को नष्ट करना है और सभी अस्पृश्य जातियों का एक ही समाज करना है। सिर्फ मांग जाति का बने रहने से कोई फायदा है, ऐसा मुझे नहीं लगता। यदि आप जाति का झूठा अभिमान करते रहेंगे तो तुम्हारा सम्पूर्ण नाश हो जाएगा, यह इशारा इस अवसर पर आपको स्पष्टता से देना जरूरी है।“

बाबासाहेब डॉ. बी. आर. अम्बेडकर जी के उपरोक्त संबोधन के पश्चात धन्यवाद ज्ञापन हुआ।

मुम्बई प्रांत मातंग परिषद को सफल बनाने में और कार्य का प्रचार-प्रसार करने हेतु में कृष्णा गुंडाजी कुचेकर, रामचन्द्र गुंडाजी कुचेकर, यशवंत लक्ष्मण वायदंडे, शंकर बुवा सकटे, बाबू रामा कांबले, ज्ञानू दाजी इवले, मारूति ज्ञानू तुपसौंदरे, धोंडीबा तालू कांबले, केशव धोंडी देवकुले, गंगाराम सखाराम यादव, लाला पिरा यादव, भागाराम जाधव, लहू लक्ष्मण अल्हाट, हन्या केशव बोतालजे, तुकाराम यशवंत चव्हाण, रत्नाकर

खंडूजी आवले, शंकर नाथा आवले, निवृति डी. शिंगोणकर, दाजी संतू काम्बले, चिंगाजी वायदंडे, के.डी. वायदंडे, आबा गेणू खंडाले, लहू अंकूष मोहिते, के.एम. काफोखे, शंकर शिंदे, बालू सखाराम यादव, एस.के. देशमुख, मार्तंड तपाया माने, राऊ मलू माने आदि सदगृहस्थों ने जी-जान से मेहनत कर मातंग परिषद के कार्यों को सफल बनाने के लिए नायगाव बी.डी. चाल नम्बर 4 और 13 के छात्र-छात्राओं ने स्वागत पर गीत गायन करने के लिए मास्टर लक्ष्मण कुचेकर जी को उनकी मेहनत के लिए, और इसी तरह मे. काम्बले बैण्ड मास्टर जी ने कुलाबा के छात्रों की रिहर्सल करा कर उन्हें अल्पावधि में गायन में प्रवीण करने के कारण कुलाबा बैंड, कुलाबा स्काऊट, सैतान चौकी स्काऊट, वडाला स्काऊट, नायगाव स्काऊट, डिलाईट रोड स्काऊट ने सम्मेलन में आकर स्वयं अपनी प्रस्तुति के द्वारा सभा की शोभा बढ़ाने के लिए तथा सम्मेलन की व्यवस्था बनाने के लिए और इसी तरह मुम्बई के निवासियों द्वारा इस आयोजन के लिए अपनी शक्ति के अनुसार आर्थिक सहायता करने के कारण इन सभी का आभार व्यक्त किया गया। पुणे, नगर, दौंड, सोलापुर, कर्हाड, नाशिक आदि शहरों से प्रतिनिधियों ने सम्मेलन में उपस्थित हो सभा को सफल बनाने हेतु उन सभी का अभिनन्दन किया गया।