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भर्ती होगी। मेरे अपने लिए भी कहीं कोई गुंजाइश नहीं रहेगी। मुझसे सुभेदार घाटगे ने 50 साल अधिक काम किया है। श्री. शिवराम जानबा कांबले ने 60 साल अधिक काम किया है। उनकी उम्र की तुलना में शायद मैं भी काम नहीं कर पाऊं। इसलिए मुझे ऐसे विवादों में पड़ने की जरूरत नहीं है। जब तक आपका मुझ पर विश्वास है, तभी तक मैं आपका नेता पद संभालूंगा। इस समय हमें बड़ा समंदर पार कर जाना है। इसलिए मैं जो कहूंगा वही मल्लाह होगा। और बेहतरीन नाव मुझे मिलनी चाहिए। तभी मैं उस नाव पर चढूंगा। टूटी हुई नाव और बेकार के खेवय्ये मिले, तो मैं नाव में चढूंगा ही नहीं। मैं नहीं चाहता आपका नेता बनना। इसलिए आप ध्यान में रखें कि हर एक के पास कोई न कोई काबीलियत होनी चाहिए। ‘नाम से नहीं, काम से है’, यह बात ध्यान में रखें।“