95. अंधे और स्वार्थी नजरिए से पूरे समाज का नुकसान होगा - अक्तूबर 1936 जलगाव - Page 553

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अंधे और स्वार्थी नजरिए से पूरे समाज का नुकसान होगा

गुरुवार दिनांक 8 अक्तूबर, 1936 के दिन परमपूज्य डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर सुबह की गाड़ी से 6.30 बजे जलगाव स्टेशन पर आए। उस समय पूर्व खानदेश की कुछ प्रमुख हस्तियों ने उपस्थित रह कर उनका स्वागत किया। स्वागत के समय अस्पृश्य नेता मे. सोनू नारायण मेढे, शामराव कामाजी जाधव, रायला झगा निकम, लक्ष्मण पाहुणा मेढे, धनाजी रामचंद्र बिर्हाडे, मोतीराम रामजी बिर्हाडे, देविदास सोनावणे, नामदेव सोनावणे, ओंकार सोनावणे, दिवाण सीताराम चव्हाण, माछाडे, मि. प्रधान वकील, वानखेडे, बारसे, बहिरुपे, के. एल. तायडे, बडगे, नामदेव भागाजी भालेराव, शिवा रघुनाथ, भास्कर गरबड, वाघ आदि खानदेश के प्रमुख लोग उपस्थित थे। डॉ. बाबासाहेब गाड़ी से उतरते ही जयकार से उनका स्वागत किया गया। रा. मेढे ने उन्हें हार अर्पण किया। फिर आए हुए लोगों के साथ बातचीत करते हुए मे कलक्टर साहब (खानदेश पूर्व) की गाड़ी में बैठ कर डॉ. बाबासाहेब मिस्टर बालासाहेब वकील के घर गए। डॉ. बाबासाहेब 11 बजे कोर्ट के काम से कोर्ट पहुंचे। डॉ. बाबासाहेब के वहां पहुंचते ना पहुंचते लोगों के जथे कोर्ट की ओर आने लगे। 15-20 मिनट में कोर्ट का पूरा परिसर भीड़ से उमड़ पड़ा और यूं लगने लगा कि वहां कोई यात्रा का आयोजन किया गया हो। कोर्ट के काम में दिक्कतें आने लगीं। आखिर जजसाहब को कोर्ट के दरवाजे बंद करने पड़े। इसके बावजूद लोग कोर्ट के सामने वाले बडे़ मैदान में बाबासाहेब के आने का इंतजार करने लगे। कोर्ट का कामकाज ठीक 5.20 बजे खत्म हुआ। वे बाहर आए। और जैसे कि पंफलेट में जाहिर किया गया था, जलगाव के म्युनिसिपल टाऊन हाल में डॉ. बाबासाहेब की मोटर आकर रुकी। उस समय चार हजार से अधिक लोग वहां इकठ्ठा हुए थे। जयकार की ध्वनि से बाबासाहेब का स्वागत किया गया और सभा की शुरुआत हुई। इस अवसर पर नासिक के प्रमुख नेता श्री. भाऊराव गायकवाड, अहमदनगर के युवा नेता श्री. प्रभाकर जनार्दन रोहम और बलराम दादा टेलर आदि लोग हाजिर थे। पहले श्री. भाऊराव गायकवाड़ का आगामी असेंबली चुनावों के बारे में जोरदार और दिल को छू जाने वाला भाषण हुआ।

उसके बाद बाबासाहेब बोलने के लिए उठ कर खडे़ हुए। उस समय तालियों की गूंज से वातावरण भर गया। सब दूर उनके जयकार की ध्वनि गूंज उठी। उसके बाद जब बाबासाहेब ने सबको शांत रहने का इशारा किया तो पल भर में पूरा वातावरण

* ‘जनता’ : 17 अक्तूबर, 1936