95. अंधे और स्वार्थी नजरिए से पूरे समाज का नुकसान होगा - अक्तूबर 1936 जलगाव - Page 555

538 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

कुर्सियां मिली हैं उन पर केवल शोभा बढ़ाने वाले लोग हमें भेजने नहीं हैं। हमें काम करना है। आज उनके जितना शिक्षित व्यक्ति पूरे जिले में और कोई नहीं है। उसने बी. ए. किया है। वह मेरा कोई रिश्तेदार नहीं है। और न ही वह मुझे अपना भŸा देगा। आप ही के भले के लिए मैंने उन्हें चुना है। मैंने पक्षपात नहीं किया है, अच्छी तरह, सभी पहलुओं पर सोच कर ही और पूर्व खानदेश का नक्शा आंखों के सामने रखकर ही मैंने जाधव को चुना है। और मैं फिर से बताता हूं कि जाधव लायक उम्मीदवार है।

आप कहेंगे कि अनपढ़ मराठे और कुणबी भी कौंसिल में जाते हैं। वे कहां अंग्रेजी जानते हैं? अगर उनका आदमी चलता है, तो फिर हमारा क्यों नहीं? लेकिन इस मामले में मेरा आपसे यह कहना है कि, मराठे, कुणबी और आपमें जमीन-आसमान का फर्क है। उनके लिए सब कुछ अनुकूल है, उनके लिए किसी बात की कोई कमी नहीं। लेकिन आप कंगाल हैं। आपको सब कुछ मेहनत करके हासिल करना पड़ता है। और वह सब सुलभता से पाना हो, तो केवल कानूनन पाया जा सकता है। और सिर्फ इसी वजह से आपके अनपढ़ उम्मीदवार नहीं चलेंगे। जानकार लोग होना जरूरी है। क्योंकि आप की ग्रहदशा को सुधारना है। और इसीलिए जाधव जैसे लायक उम्मीदवार को आप चुन कर दें यह जरूरी है। यह आपका कर्त्तव्य है। अगर आपने ऐसा नहीं किया तो आप अपना नुकसान करवा लेंगे। इस बारे में मैं आज ही आपको चेतावनी दे रहा हूं। किसी ने अगर मूर्खता की भी तो आप तो ना करें। किसी एक ने चोरी की तो बाकी सब बेकार में रस्सी बांध कर फांसी ना चढ़ें। पिछले दो हजार सालों से आपके पूर्वज इस देश में रहते आए हैं। लेकिन बताइए उनमें से कौन ब्राह्मणों के पैर से पैर सटाकर बैठा है? वह भाग्योदय आज आपको प्राप्त हो रहा है। ऐसे समय अगर आप अंधे और स्वार्थी बने रहे तो पूरे समाज का ही नहीं तो खुद अपने बीबी-बच्चों का भी नुकसान करेंगे। इसीलिए, इन सभी लोगों की ओर से मैं मे. मेढे-बिर्हाडे से बिनती करता हूं कि आप समाज की उन्नति के आड़े न आएं। बिनावजह हुल्लड़ न मचाएं। लेकिन इतना कहने के बावजूद अगर वे नहीं सुनते हैं तो फिर आप क्या करेंगे? आप क्या मेरा विरोध करेंगे? (दूर-दूर तक आवाज गूंजती है - नहीं! नहीं!! नहीं!!!) समाज को धोखा देंगे? (फिर वही आवाज गूंजती है) फिर आप करेंगे क्या? आपके क्षेत्र में 5000 मतदाता हैं। हर किसी को मतदान का हक मिला हुआ है। और आप उसका सही इस्तेमाल ही करें। इसीलिए हर किसी को सोचना होगा। पूरे समाज का काम ठीक-ठाक हो ऐसा अगर आपको लगता है तो अपना कर्त्तव्य निभाएं और सब जी-जान से मेहनत कर श्री. जाधव को चुनाव में जिता दीजिए। टूटी हुई नाव और बेकार खेवैय्ये देकर अगर आप नाव को पार पहुंचाना चाहते हैं, तो मैं उस