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नाव की कभी भी जिम्मेदारी नहीं लूंगा। इतना ही नहीं, मैं ऐसी नाव में कदम तक नहीं रखूंगा। इसीलिए, मैं जिन्हें चुनूं वही खेवैये मुझे देने होंगे। तभी मैं उस जहाज को सही ढंग से पार ले जा सकता हूं। आखिर मैं आपसे विनति करता हूं कि आप श्री जाधव को ही जिता दें।“
इसके बाद श्री. वारभुवन ने कहा, डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर ने जो अमूल्य मार्गदर्शन किया वह सब लोग ध्यान में रखें। फिर उन्होंने श्री. जाधव को चुनाव जिताने के लिए एक जलसा गांव-गांव जाकर प्रस्तुत करने का निर्णय घोषित किया।