7. जागृति की ज्योत को कभी भी बुझने न दें - मार्च 1927 कोलाबा - Page 57

40 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

कारण यह जाति स्वतंत्ररूप से अपनी उन्नति के रास्ते पर नहीं बढ़ सकती। क्योंकि कल जब मंदिर प्रवेश की बात उठेगी, * सार्वजनिक तालाबों पर पानी भरने और मरे जानवरों को न उठाने की बात उठेगी तो गांव के लोग रोटियां देना बंद कर देंगे तो इनकी तो हालत खराब हो जाएगी। इस तरह बासी और जूठन खाने के लिए अपनी मनुष्यता को बेचना यह बहुत ही शर्म और लज्जा की बात है। जूठे टुकड़े मांगना छोड़कर गांव के अन्य लोगों की तरह खेती नहीं कर सकते हो क्या? हो सकता है

खेती खरीदना अस्पृश्यों के लिए थोड़ा कठिन होगा मगर वन विभाग कितनी खाली जमीनें हैं और कोई अस्पृश्य आदमी मांग करे तो वह उन्हें मिल सकती हैं।

लेकिन यह सब कैसे संभव हो? मुझे लगता है जब तक हमें बासी टुकड़े खाने के लिए मिलते रहेंगे तब तक यह स्थिति बनी ही रहेगी। जब तक पुराना रास्ता कायम है तब तक कोई नए रास्ते पर चलने की पहल नहीं करेगा। पुराने रास्ते पर चलकर हम आज मानवीयता से दूर हो गए हैं। आप सभी को इस बात पर विचार करना चाहिए कि आप उस रास्ते को कब तक जारी रखोगे। सज्जनों, हर सुधार के बारे में ”बुजुर्गों की रीत“ इस प्रदेश के लोगों का महामंत्र होता है। सभी नई योजनाओं के समय फिर वह अच्छी हो या बुरी इस मंत्र का जाप चलता रहता है। इसका मतलब यह है कि बुजुर्गों ने किसी मामले में कोई बिना सोचे समझे कोई रिवाज शुरू किया तो उसके वंशज भी उसे जारी रखना चाहते हैं भले ही वह कितना भी विघातक हो। सभी मामलों में हम पुराना ही अच्छा है इस कहावत को पकड़कर बैठ गए तो नए सुधार कभी होंगे ही नहीं। इसके अलावा क्या हर मां-बाप की यह इच्छा नहीं होनी चाहिए कि उनके बच्चों की हालत उनकी हालत से बेहतर हो। यदि ऐसी इच्छा नहीं हो तो इस मां-बाप की जोड़ी और जानवरों की जोड़ी में क्या अंतर रह जाएगा। सज्जनों आप अपने लिए न सही मगर अपनी संतानों के लिए मेरे कहे पर ध्यान दें। आप यह सवाल कर सकते हैं कि हमें जितना मिल रहा है उतना काफी है। बड़े झंझट हमें नहीं चाहिए। आधी को छोड़कर पूरी के पीछे क्यों भागें। लेकिन मैं आपकों आगाह कर रहा हूं कि मैं जो बता रहा हूं उस दिशा में आप लोगों ने कोशिश नहीं की तो तो आज जो चौथाई रोटी मिल रही है वह भी कल नहीं मिलेगी।

ये विचार मैंने केवल आपके ही सामने प्रगट किए है ऐसा नहीं है। मुझे जब भी मौका मिला मैंने यही विचार रखे हैं। आपको खासतौर पर यह बताना चाहता हूं कि आप सभी को जागृति का काम विशेष रूप से करना चाहिए। फौज वाली पीढ़ी के गुजर जाने के बाद इस प्रदेश के लोग मृतवत हो गए हैं। किसी प्रकार की गतिविधि है ही नहीं। घाटक्षेत्र में अनेक सम्मेलन होने के बाद अब यह बड़ी सभा हो रही है।

* अब रायगढ़ जिला