7. जागृति की ज्योत को कभी भी बुझने न दें - मार्च 1927 कोलाबा - Page 60

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(अ) शिक्षा की प्रगति की जांच करने के लिए एक समिति नियुक्त की जाए। (ब) जिलों में छात्रावास खोले जाएं।

(क) निजी संस्थाओं द्वारा चलाए जाने वाले छात्रावासों के लिए हर महीने

प्रति छात्र

(10) दस रू. की ग्रांट दी जाए।

(़ड) जहां तीस बच्चे हो ऐसे गांवों में स्कूल खोले जाएं।

(इ) छात्रवृŸायां दी जाएं। समूह-तीन

पहला प्रस्ताव - यह परिषद बहिष्कृत वर्ग के पंचों से अनुरोध करती है कि शादियों के समय निम्न बातों पर अमल करें-

(अ) 20 वर्ष से कम उम्र के लड़के और 15 वर्ष से उम्र की लड़की की शादी

करने की प्रथा बंद की जानी चाहिए।

(ब) पंच यह हिदायत दें कि जहां स्कूल हैं वहां लोगों को अपने लड़की और

लड़कों को शिक्षा देनी ही चाहिए। इसका उल्लंघन करने पर दोषी माना

जाएगा।

(क) पुनर्विवाह करने से पहले वर-वधू के बारे में पूरी जानकारी हासिल किए

बगैर पुनर्विवाह न कराएं।

(ड) पुनर्विवाह में सात रु. नेग दिया जाए और साड़ी व्लाऊज, कंगन, नथ

और पंचों का खाना। इसके अलावा और कोई लेन-देन की उम्मीद पंचों

द्वारा नहीं की जानी चाहिए। दूसरा प्रस्ताव -

(अ) अस्पृश्य लोगों को महारी का पेशा जैसे छोटे धंधे छोड़कर खेती जैसे स्वतंत्र

पेशे अपनाने चाहिएं।

(ब) खेती के लिए आवश्यक होने पर सहकारी समितियां (क्रेडिट सोसायटी)

शुरू की जाएं।

यह सभा बहिष्कृत वर्ग से अनुरोध करती है कि अकाल, अतिवृष्टि का सामना करने और साहूकारों के शिकंजे से छूटने के लिए - सहकारी कोष - स्थापित किए जाएं।