8. राज्य का अभिमान न हो तो राज्य टिकता नहीं - मई 1927 बदलापुर (ठाणे ) - Page 66

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बाद में रात को नौ बजे से साढ़े ग्यारह बजे तक कीर्तन हुआ। इस कीर्तन में लोग किसी तरह के भेदभाव के बगैर कीर्तन सुन रहे थे। महार जाति के कुछ लोग तो प्रवचनकार के सामने ही बैठे थे। कीर्तन के बाद डॉ. अम्बेडकर के नेतृत्व में अंदाजन 15 हजार लोगों ने शिवाजी महाराज की पालखी की शोभायात्रा में शामिल होकर सारे नगर की परिक्रमा की और उसके बाद उत्सव समाप्त हुआ।

संदर्भ : ‘‘बहिकृष्कृत भारत’’, 20 मई, 1927