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रविवार, 5 जुलाई, 1927 को मुबई शहर के सर कावसजी जहांगीर हाल में सभी बहिष्कृत वर्गों की सार्वजनिक सभा का आयोजन किया गया जिसका मकसद महाड़ के अत्याचारों का निषेध और उसके बारे में भावी कार्यक्रम तय करना था। उसकी अध्यक्षता डॉ. अम्बेडकर एम.ए,पी.एच. डी.डी.एस.सी, बार-एट लॉ, एम.एल.सी ने की। सभा में बहिष्कृत वर्ग की विभिन्न जातियों के अलावा ‘ब्राह्मण-ब्राह्मणेŸार’ अखबार के संपादक देवराव नाईक, सो.सा. लीग के एक प्रतिबद्ध कार्यकŸार् गं.नी. सहस्त्रबुद्धे और मद्रास की तरफ के गीतानंद ब्रह्मचारी आदि लोग उपस्थित थे। सभा में निम्न प्रस्ताव पारित हुए।
प्रस्ताव 1 - अस्पृश्य वर्ग की शिकायतों और उन पर होने वाले अत्याचारों का
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सरकार की तरफ से उचित ढंग से निवारण हो। सभा की मांग है कि अस्पृश्यों की उन्नति के लिए समय-समय पर पारित हुए प्रस्तावों और भविष्य में पारित होने वाले प्रस्तावों पर कठोरता से अमल के लिए सरकार को मद्रास क्षेत्र की तरह मुंबई क्षेत्र में भी एक अलग अधिकारी नियुक्त करना चाहिए।
प्रस्ताव 2 - बहिष्कृत हितकारिणी सभा ने महाड में सत्याग्रह की योजना बनाई है। यह सभा उसका पूर्ण समर्थन करती है। यह सभा बहिष्कृत वर्ग की सभी जातियों से इस सत्याग्रह में भाग लेने की अपील करती है।
उपरोक्त प्रस्ताव पर मेसर्स वनमाली, मोहिते, मारवाड़ी मास्टर, खोलवडीकर, गोविंदजी माधवदास, गंगावणे, गायकवाड़, जाधव आदि के भाषण होने के बाद अध्यक्ष ने श्रीमान नाईक और गीतानंद ब्रह्मचारी से भाषण करने का अनुरोध किया। इन दोनों ने अपने भाषण में कहा, कि आपको अपने मानवीय अधिकार हासिल करने के लिए हर संभव प्रयास करने चाहिएं। ऊंची जातियों के लोग बड़ी-बड़ी बातें करते हैं। यदि उन्हें सचमुच आपके प्रति सहानुभूति है तो इस सभा का आमंत्रण अखबारों के जरिए सभी को दिए जाने के बाद ऊंची जाति के लोगों में से कोई इस सभा में न आए यह खेदजनक बात है। ऐसी सभाओं में हिंदू महासभा के नेताओं को अवश्य हिस्सा लेना चाहिए। लेकिन यदि वे आपकी सभा में शरीक न हो रहे हैं तो भी आप चुप न बैठें। यदि कोई तुम्हें अस्पृश्य कहे तो जिस तरह बत्तख को पानी में डुबोकर ऊपर नीचे किया जाता है उस तरह आप भी जो कोई आपको अस्पृष्य कहे उसकी बाजुओं को पकडकर पानी में ऊपर नीचे करके डुबोइए। ऐसा तब तक करो कि आदमी फिर कभी आपको अस्पृश्य न कहे। इसके बाद सभा के अध्यक्ष डॉ अम्बेडकर का भाषण हुआ। अपने भाषण में उन्होंने कहा,