10. हमें निडर और स्वाभिमानी लोग चाहिएं - जुलाई 1927 मुबई - Page 69

52 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

”हमने दोनों प्रस्ताव तालियों की गड़गड़ाहट के बीच पारित किए हैं। उसमें से दूसरे प्रस्ताव के बारे में आपको पर्याप्त जानकारी नहीं है, ऐसा लगता है। दूसरा प्रस्ताव सत्याग्रह के बारे में है। सत्याग्रह का मतलब है युद्ध। मगर यह युद्ध तलवार, बंदूक, तोप, बम आदि हथियारों की लड़ाई नहीं है। जिस प्रकार पतुतललाखली और वायकोम आदि स्थानों पर लोगों ने सत्याग्रह किया उसी तरह हमें भी महाड़ में सत्याग्रह करना है। यह सत्याग्रह करते समय शायद सरकार शांति भंग न हो इसलिए किसी धारा में गिरफ्तार कर हमें जेल में भेज सकती है। तो जेल जाने की तैयारी होनी चाहिए। मैं आपसे साफ कह रहा हूं जिन्हें अपने बीवी-बच्चों की चिंता करनी है, ऐसे लोग सत्याग्रह में बिल्कुल भाग न लें। हमें निडर और स्वाभिमानी लोग चाहिएं। ऐसे लोग ही सत्याग्रह के लिए अपने नाम लिखाएं, जिनका पक्का निश्चय है कि अस्पृश्यता हमारे देश पर कलंक है और इसे दूर करके रहूंगा। हमें आशा है कि बहिष्कृत समाज से ऐसे दृढ़ निश्चय वाले लोग आगे आएंगे।“ इस भाषण के बाद श्री सीताराम नामदेव शिवतरकर ने सभी का आभार व्यक्त किया। आभार प्रदर्शित करते हुए उन्होंने कहा कि इस सभा में बहिष्कृत वर्ग की सभी जातियों के लोग और गीतानंद ब्रह्मचारी और रा. नाईक और सहस्त्रबुद्धे आए हैं। उनके प्रति हम आभार प्रगट करते हैं। यह महाड़ के बारे में आखिरी सभा है। इसके बाद महाड सत्याग्रह को लेकर सभा नहीं होगी। लेकिन आज की सभा में पारित प्रस्ताव के अनुसार सत्याग्रह की तैयारी करनी है। हम वर्षा ऋतु खत्म होने के बाद सत्याग्रह करने वाले हैं। इसलिए जिन्हें अध्यक्ष के कहे मुताबिक अपना नाम सत्याग्रह के लिए लिखवाना है, वे परेल के दामोदर हाल में स्थित बहिष्कृत हितकारिणी सभा के कार्यालय में अपना नाम लिखवाएं।

संदर्भ : ‘‘बहिष्कृत भारत’’ 15 जुलाई, 1927

5 जुलाई की जगह तारीख 3 जुलाई, 1927 हो सकती है-सम्पादक