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महार जाति पर स्वार्थी होने का आरोप निराधार
बुधवार, 20 जुलाई, 1927 को शाम साढ़े सात बजे पूना के मांगवाड़ा में पूना के - ‘दीनबंधु’ समाचार पत्र के संपादक डॉ. नवले की अध्यक्षता में अस्पृश्यों की सार्वजनिक सभा हुई। उस सभा में अस्पृश्य और स्पृश्य वर्ग के लगभग 300 लोग उपस्थित थे। मुंबई विधानमंडल में सरकार द्वारा नियुक्त सदस्य डॉ. अम्बेडकर, बार-एट लॉ और डॉ. सालुंखे, सुभेदार घाडगे, मि. राजभोज, मि. के जाधव, बी.ए, मि. पाताडे, मि. गायकवाड़, मि. सावलेकर, मि. इंगले, लांडगे, मि. सावलेकर, मि. के.के. सकट, मि. घाडगे, मि. वायदंडे। वराड (विदर्भ) के आनंदस्वामी, मि. पंढरीनाथ पाटील, श्री धुंडीराज पंत ठेंगडी, आर्यसेवक रा. ओघले, रा. शंकरराव पोतनीस, रा. देशपांडे आदि लोग सभा में प्रमुख रूप से नजर आ रहे थे। सभा के दौरान बारिश हो रही थी। लेकिन लोग डॉ. अम्बेडकर जैसे अनुभवी नेता का भाषण सुनना चाहते थे, इसलिए बारिश के बावजूद सभा की कार्यवाही जारी रही।
रा.के.एम. जाधव के अनुरोध पर डॉ. नवले ने अध्यक्षता करना स्वीकार किया। बाद में डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर ने अपने भाषण में कहा-
”आज मैं दिल खोलकर बोलने वाला हूं। मेरे भाषण का कोई गलत अर्थ न निकाले। मि. सकट और मि. वायदांडे ने मेरी बिना वजह आलोचना करना शुरू किया है। मैं जानता हूं कि नेताओं की हमेशा आलोचना होती ही है। आप जानते हैं कि मैं महार जाति का हूं। आलोचकों का कहना है कि महार जाति स्वार्थी है। लेकिन क्या अस्पृश्य जातियों में गैर-महार जाति के लोगों ने महारों के लिए निस्वार्थ भाव से क्या कुछ काम किया है? मेरा उनसे यह प्रतिप्रश्न है।
असल में देखा जाए तो गैर-महार जातियों के लोग शैक्षणिक और संपिŸा की दृष्टि से समृद्ध हैं। मुंबई में तो चमार और ढोर जाति के लोग इतने संपन्न हैं कि वे आयकर देते हैं। ऐसा होने के बावजूद मैंने कभी नहीं सुना कि उन्होंने महार जाति के लोगों की उन्नति के लिए कुछ किया हो। इसके विपरीत हम कई उपयोगी संस्थाएं शुरू कर अस्पृश्यों की सभी जाति के लोगों की काया, वाचा और मन से संघर्ष कर रहे हैं। ”बहिष्कृत हितकारिणी सभा“ स्थापित करके मैंने अस्पृश्यों की उन्नति का काम हाथों में लिया है। सोलापुर में हमने अस्पृश्यों के लिए छात्रावास बनाया है। चमारों ने उसके लिए मदद नहीं की। फिर भी हमने महार, मांग और चमार आदि सभी जाति के छात्रों को इस छात्रावास में रखा है। मैंने मि. सकट से अनुरोध किया है कि और भी मांग जाति के छात्र छात्रावास में अवश्य भेजें। इसी तरह नाशिक