11. महार जाति पर स्वार्थी होने का आरोप निराधार - जुलाई 1927 मांगवाड़ा (पूना) - Page 73

56 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

अब हमें संगठित होकर लोगों को यह दिखा देना चाहिए कि हमारा अपमान खत्म करने के दिन अब खत्म हो गए।

इसके बाद जो अस्पृश्यों के सम्मेलन होंगे। उसका समापन मंदिर प्रवेश, सार्वजनिक तालाब का पानी पीने आदि कार्यक्रमों में होना चाहिए, ऐसी मेरी राय है। इस बार हम आलंदी में अस्पृश्यों की सभा का आयोजन करेंगे। उस समय कुछ भी हो मगर हम मंदिर में प्रवेश करेंगे, ऐसा करने पर ही हमारा कार्यक्रम पूरा होगा।“

डॉ. अम्बेडकर के इस आशय के भाषण के बाद डॉ. सालुंके ख्1, ने अपने भाषण में कहा कि गुजरात के अस्पृश्यों का महाराष्ट्र के अस्पृश्यों के आंदोलन को पूर्ण समर्थन है। बाद में वर्हाड (विदर्भ) के रा. पंढरीनाथ पाटील के भाषण के दौरान मांगबसी के एक बीमार व्यक्ति की मृत्यु हो जाने के कारण सभा स्थगित कर दी गई।

  1. डॉ. सालुंके नाम मूल मराठी पाठ में दर्ज है। किन्तु उनका नाम डॉ. सोलंकी लगता है। डॉ. सालुंके

खलिस मराठी नाम है। किन्तु इसमें वक्ता ने गुजरात की अस्पृश्य जनता की ओर से महाराष्ट्र के अस्पृश्यों के आन्दोलन का समर्थन किया है। यह कार्य गुजराती भाषी नेता ही कर सकता है।