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पर किस तरह आदमी को मुश्किल होती है तो पूरे सभागार में गंभीरता छा गई। डॉक्टर साहब दिल से बोल रहे थे। उनके हर शब्द में उनके हृदय की उत्कट इच्छा प्रतिबिंबित हो रही थी। कुल मिला कर भाषण प्रभावी और चिŸाकर्षक था। बाद में आभार प्रदर्शन के बाद अध्यक्ष को पुष्प हार पहनाया गया। इस तरह यह स्मरणीय कार्यक्रम संपन्न हुआ। *
* ‘‘बहिष्कृत भारत’’ 4 नवम्बर, 1927