14. अस्पृश्यता और सत्याग्रह की सफलता - नवंबर 1927 अमरावती - Page 94

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इस सम्मेलन में निम्न सज्जन मुख्य रूप से दिखाई दिए - अमरावती के डॉ. पंजाबराव देशमुख, बैरिस्टर तिडके, श्री चौबल वकील, श्री गवई एमएलसी, श्री के. बी. देशमुख, डॉ. भोजराजा, डॉ. पटवर्धन, श्री उŸामराव कदम आदि लोगों के अलावा इस सम्मेलन के लिए बाहर से आए श्री नानासाहब अमृतसर, मोरशी, श्री दे. वी. नाईक, संपादक ”ब्राह्मण-ब्राह्मणेतर“ श्री दŸात्रय विठ्ठल प्रधान दादर, श्री रा. दा. कवली और श्री द. रा. राराविकर आदि उपस्थित थे।

उस दिन रात में विषय निर्धारक की बैठक हुई जिसमें दूसरे दिन सम्मेलन में रखे जाने वाले प्रस्तावों पर चर्चा हुई।

14 नवंबर, 1927 को सुबह 7 बजे अमरावती के अस्पृश्य छात्रों की तरफ से डॉ. अम्बेडकर को मानपत्र देने और पान-सुपारी का कार्यक्रम हुआ। डॉ. अम्बेडकर और अन्य मेहमानों का सभी विद्यार्थियों के साथ फोटो खींचा गया। छात्रों के मानपत्र का जवाब देते हुए डॉ. अम्बेडकर ने संक्षेप में बताया कि छात्र किस तरह शीलवान बनें और वे अपने कुल को लगे अस्पृश्यता के कलंक को धोने में किस तरह मदद कर सकते हैं। बाद में सभी लोग सुबह आठ बजे सम्मेलन स्थल पर उपस्थित हुए और सम्मेलन शुरू हुआ। शुरुआत में ही बंबई से आए तार से श्री बालाराम अम्बेडकर के निधन का समाचार आया।

इस दुखकारक समाचार को सुन कर सभी को बुरा लगा। लेकिन इस परिस्थिति में भी डॉ. अम्बेडकर ने भी बहुत धैर्य से सम्मेलन के काम को जारी रख कर अपने लोकनायकत्व को प्रकट किया। सम्मेलन की कार्रवाई 1 बजे तक चलती रही ।

पहला प्रस्ताव :

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इस सभा के सम्माननीय अध्यक्ष डॉ.ॅ अम्बेडकर के बडे़ भाई श्री बालारामजी के अचानक निधन के दुःखद समाचार से यह सभा अत्यंत दुखी है। और स्वर्गीय बालारामजी अम्बेडकर के इस दुःखद निधन पर इस सभा का कामकाज दस मिनटों के लिए बंद रखा जाता है।

दूसरा प्रस्ताव :

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(अ) यहां के सम्माननीय नेता नामदार श्री गणेश श्रीकृष्ण खापर्डे, काउिंंसल

ऑफ स्टेट के सदस्य और श्री अंबादेवी देवस्थान के अध्यक्ष का पत्र

सत्याग्रह समिति के अध्यक्ष श्री गवई एम.एल.सी. ने सभा के सामने रखा।

उस पर विचार करने के बाद यह सभा सत्याग्रह समिति को यह निर्देश

देती है कि नामदार खापर्डे ने समझौते की जो इच्छा दिखाई है और

उसकी सफलता के लिए पत्र में कुछ समय देने की मांग की है। इस