118 12/13.2.1938 आजादी, समता, बंधुभाव पर आधारित नई पद्धति श्रमिक संगठनों का लक्ष्य हो - मानमाड़ - Page 102

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आजादी, समानता और बंधुभावना पर आधारित नई पद्धति श्रमिक

संगठनों का लक्ष्य हो।

मानमाड़ में अखिल जी आईपी रेलवे अस्पृश्य कामगार परिषद आयोजित करने के पीछे जो सोच है उसे विस्तार से बताने वाला एक सूचना पत्र रेल-कामगारों को उद्देश्य करते हुए निकाला गया था। वह इस प्रकार था-

‘‘मानमाड में इस माह के आखिर में अखिल जी. आई.पी. रेलवे अस्पृश्य कामगार परिषद आयोजित की गई है। परिषद के बारे में निर्णय लेने से पूर्व परिषद के आयोजकों में से कुछ प्रमुख लोग डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर से एक महीना पूर्व ही मिल आए थे। आज कठिन आर्थिक हालात के कारण सब जगह बुरा हाल है। गरीब कामगारों को इन हालात का तीव्र अहसास हो रहा है और अस्पृश्य कामगारों की कठिनाइयों की कोई सीमा नहीं रही है। स्पृश्य कामगारों से थोड़ी-बहुत परेशानी तो है ही साथ में अधिकारियों के कारण जो परेशानियां उठानी पड़ती हैं उनके बारे में शिकायतें सुनने के लिए कोई जिम्मेदार लोग उपलब्ध नहीं हैं या उनकी शिकायतों को सही तरीके से अधिकारियों के सामने रखने के लिए कोई प्रतिनिधि नहीं। अपनत्व की भावना के बगैर कोई काम नहीं हो सकता यह सत्य उनके अब तक के कटु अनुभव से पूरी तरह समझ में आ गई है। रेल का राक्षसों-सी मेहनत वाला काम रात-दिन करना और उसके बदले में दिन में एक बार पेट-भर खाई जा सके इतनी रोटी लायक वेतन भी मुश्किल से मिलेगा। इस काम को करते हुए पारिवारिक जिम्मेदारियां निभाते हुए कर्जों में डूबने-सी हालत होती है सो अलग। ऐसे मुश्किल हालात अस्पृश्यता के कलंक के साथ सहते रहना दिनोंदिन और भी कठिन होता जा रहा है। इन सभी बातों के बारे में पूरी तरह सोच-विचार कर, सभी अस्पृश्य कामगारों को इक्ट्ठा कर हमारे अगले कार्य की रूपरेखा बनने के लिए कामगारों में से कुछ लोगों ने यह तय किया है कि वे अखिल जी आई.पी. रेलवे अस्पृश्य कामगार परिषद का गठन करेंगे।

मानमाड़ में होने वाली इस परिषद की अध्यक्षता अस्पृश्यों के सम्माननीय नेता डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर ने स्वीकारना मंजूर किया है। अस्पृश्य वर्ग की सर्वांगीण उन्नति करते हुए उन्हें राजनीतिक अधिकार दिलाने के लिए डॉ. बाबासाहेब का आज तक स्वार्थ त्याग के बारे में जनता अच्छी तरह जानती है। हिन्दुस्तान की जी.आई.पी. रेल में अस्पृश्य वर्ग के कई कामगार हैं। उनका सही संगठन अगर बनाया जाए तो पूंजीपति और मिल मालिकों के खिलाफ छिड़ी उनकी लड़ाई के बारे में योग्य-चर्चा होकर इस परिषद के अधिवेशन के जरिए अखिल भारतीय रेल कर्मचारियों के हित की कई बातें होंगी, इसमें कोई शक