118 12/13.2.1938 आजादी, समता, बंधुभाव पर आधारित नई पद्धति श्रमिक संगठनों का लक्ष्य हो - मानमाड़ - Page 103

82 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

नहीं। केवल किताबें पढ़ कर इस बात का अंदाजा नहीं हो सकता कि कामगारों का जीवन कितना कष्टमय होता है। प्रत्यक्ष रूप से जब तक उनके जीवन में शामिल हुए बगैर उनके असहनीय हालात के बारे में सोच पाना मुश्किल है रेलवे जैसी बलाढ़य व्यापारिक संस्था के लिए अपने कर्मचारियों का खयाल रखना कितना जरूरी है यह किसी और के बताने से कोई फायदा नहीं। इन अमीरों को ही उसका अहसास होना जरूरी है। जिनकी मेहनत के बल पर हम अमीर बन कर ऐसोआराम में जी रहे हैं उन श्रमिकों को कम से कम दो वक्त भरपेट खाना मिल सके इतना वेतन देना हर मिल मालिक का, हर अमीर का और हर पूंजीपति का पहला कर्त्तव्य है। श्रमिकों की लड़ाई भूख की लड़ाई है। खुद को और अपने परिवार को दो वक्त की नोन-रोटी कैसे मिल पाएगी इसी चिंता में कामगार डूबा रहता है। ऐसे में थोड़ा आराम या ऐसोआराम के बारे में सोचने की उनकी मानसिक स्थिति नहीं होती। इन सभी हालात पर सोचने के बाद ही आज की परिषद लेने की बात तय हुई है।

इस परिषद को सफल बनाने के लिए मनमाड, भुसावल, कल्याण, इगतपुरी, नांदगांव, दौंड, सोलापुर, ठाणे और मुम्बई आदि जगहों के प्रमुख कार्यकर्त्ताओं ने डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर के साथ पहले ही सोच-विचार किया है। परिषद लेने के बारे में जानकारी मिलते ही मुम्बई से लेकर दिल्ली और इलाहबाद, लखनौ, कानपुर, जबलपुर, रायपुर आदि बै्रंच लाईन विभागों से परिषद को सफल बनाने के लिए प्रत्यक्ष सहानुभूतियुक्त समर्थन मिल रहा है। इस प्रकार हर प्रांत के प्रतिनिधियों की प्राथमिक स्वरूप की परिषद को सफल बनाने के लिए सभी अस्पृश्य रेलवे कामगार परिषद के चालकों की अपनेपन से, अपने ही कार्यक्रम के रूप में मान कर मदद करें। परिषद के महासचिव हैं श्री आर. आर. पवार। उनके कार्य के बारे में अस्पृश्य रेल कर्मचारी जानते हैं। साथ ही, हमारे परमपूज्य नेता और पृथक मजदूर पार्टी के अध्यक्ष डॉ बाबासाहेब अम्बेडकर की अध्यक्षता में यह परिषद हो रही है। परिषद का अनुरोध पत्र तथा चंदे के लिए रसीद-पुस्तक सभी जगहों के कार्यकर्त्ताओं के पास भेजी गई हैं। हर अस्पृश्य रेलवे कामगार को परिषद का प्रतिनिधि बनना ही होगा। आत्म्निर्भरता के जरिए अपना संगठन खड़ा किए बगैर हमारे कार्य को सच्ची सफलता नहीं मिलेगी। डॉ. बाबासाहेब का यह संदेश हर अस्पृश्य रेल कामगार अपने मन में जागृत रखे। मनमाड की यह जी.आई.पी. रेल अस्पृश्य कामगार परिषद को सफल बनाना हमारे श्रमिक आंदोलन के लिए विशेष महत्त्वपूर्ण है इस बात को हर कोई ध्यान में रखे और परिषद को तन-मन-धन से सहयोग देकर सफल बनाने का निर्श्वार करें।’’ ख्1,

­ यह परिषद इसी वर्ष मनमाड में लेना तय हुआ था। लेकिन परिषद के अध्यक्ष डॉ. बा­ बासाहेब अम्बेडकर के पास तय तरीखों पर उपस्थित हो पाना संभव नहीं हो पाया था। अब 19 और 30 जनवरी, 1938 को यह परिषद मनमाड में निश्चित रूप से होने जा रही है।

  1. जनताः 8 मई, 1937