118 12/13.2.1938 आजादी, समता, बंधुभाव पर आधारित नई पद्धति श्रमिक संगठनों का लक्ष्य हो - मानमाड़ - Page 104

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अम्बेडकर द्वारा परिषद के आयोजकों को उक्त तारीखों पर परिषद को आयोजित करने की सूचना भेजी और कार्यकर्त्ता उत्साह के साथ तैयारी में जुट गए हैं। रेलों में मिलों में या बड़े-बड़े कारखानों में अस्पृश्य कामगारों को कितनी तकलीफें उठानी पड़ती हैं, मेहनत-मजदूरी वाले इस काम में केवल अस्पृश्य होने के नाते उन्हें कितना अपमान सहना पड़ता है और आर्थिक मोर्चे पर भी बहुत नुकसान सहना पड़ता हैं। सुधार के इस युग में ये प्रत्यक्ष स्थितियां लोगों के सामने लाकर लोगों को यकीन दिलाया जा सकता है कि अस्पृश्य होने का खामियज श्रमिकों को किस तरह चुकाना पड़ता है। अस्पृश्य कामगारों के साथ होने वाले इस अन्याय को दूर करने के लिए इस प्रकार अलग से रेल श्रमिकों की परिषद की आयोजन करना पड़ रहा है। अस्पृश्य कामगार अन्य श्रमिकों से अलग नहीं होना चाहते। सभी कामगारों की जो अन्य मांगें हैं उन्हें पाने के लिए अस्पृश्य कामगार उनके साथ संघर्ष करेंगे। लेकिन आज अस्पृश्य कामगार को उसकी अस्पृश्यता के कारण जिन मुश्किल स्थितियों का सामना करना पड़ रहा है उस पर सोच-विचार के लिए तथा अन्य कामगारों के हितों के बारे में नीति तय करने के लिए यह जी.आई.पी. रेल कामगार परिषद लेनी पड़ रही है।

इस प्रकार संक्षेप में परिषद बुलाने की जरूरत के बारे में बताया गया है। अस्पृश्य रेलवे कामगार अपना संगठन बनाएं और मनमाड की इस परिषद को सफल बनाने की कोशिश करें। परिषद के युवा और उत्साही महासचिव श्री आर.आर. पवार ने परिषद को अपूर्व और सफल बनाने का संकल्प लिया है। वे अपने सहयोगी और कार्यकारी मित्रों की मदद से यह कार्य करने लगे हैं। अध्यक्ष डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर रेल कामगारों के मार्गदर्शन की नीति वाला भाषण देंगे। यह परिषद अखिल भारतीय होगी। उसकी सफलता भारतीय रेल अस्पृश्य कामगारों की हितसाधना में है। इसीलिए सभी श्रमिक मिल कर अपनी प्रचंड शक्ति के सहारे परिषद को उत्साह के साथ संपन्न कराने के लिए परिषद के आयोजकों का साथ दें। अस्पृश्य कामगार समय पड़ने पर अपना आंदोलन आत्मनिर्भरता के रास्ते कैसे सफल बना सकते हैं यह भी दुनिया देखेगी। हमारे अब जागरूक हुए अस्पृश्य कामगार अपने कर्त्तव्यों के प्रति ईमानदार रहते हुए इस परिषद की अलौकिक शक्ति सबको दिखा देंगे इसका हमें यकीन है।’’ ख्2,

इस परिषद में उपस्थित रहने के बारे में सूचित करने के लिए डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर ने महासचिव के नाम खत लिखा। उसके अनुसार महासचिव ने बाबासाहेब को

खत भेजा और सार्वजनिक घोषणा भी की। ये दोनों दस्तावेज इस प्रकार हैं-

राजगृह हिन्दू कॉलोनी

दादर, मुम्बई दिनांक 14.1.1938

श्री रामचंद्रराव पवार, महासाचिव, रेलवे दलित कामगार मंडल तथा कामगारों,

  1. जनताः 25 दिसम्बर, 1937