118 12/13.2.1938 आजादी, समता, बंधुभाव पर आधारित नई पद्धति श्रमिक संगठनों का लक्ष्य हो - मानमाड़ - Page 121

100 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

लड्डु-पेड़े खाने के लिए घर भेज दिया जाएं उस प्रकार इस बच्चे को अब के बाद सिर्फ अच्छा बर्ताव करने की शर्त पर घर में प्रवेश मिला अब यह पंडित पूरी तरह बदल चुका है। इतना सीधा हो गया है कि कभी फहराते हुए घुमाए गए और अब काँग्रेस के दाहिने हाथ के तौर पर माने जाने वाले लाल निशान का भी वह विरोध करते हैं। बिहार के इस दक्षिणपंथी ने अपने असली दांत दिखाए हैं। किसान नेता स्वामी सहजानंद काँग्रेस छोड़ चुके हैं और उनके सहयोगी जयप्रकाश नारायण भी उसका त्याग करने की राह पर बढ़ रहे हैं। मुझे पता चला है कि ऑल इंडिया काँग्रेस कमेटी की मुंबई की सभा में काँग्रेस के इन दक्षिणपंथियों ने सोशलिस्टों के अनुशासनहीन बर्ताव की निंदा की और काँग्रेस के मंच से समाजवाद के प्रचार का आरोप लगाते हुए इंडियन पिनल कोड के मुताबिक जिस प्रकार पहला गुनाह करने वाले को ताकीद दी जाती है इस प्रकार ताकीद दी गई। काँग्रेस के समाजवादियों का पोलापन ऐसा है।

साम्राज्यवाद की प्रतिक्रिया के कारण भारतीय राजनीति धुंधला गई है। कामगारों के अधिकार हड़पने वाले दुश्मनों से उनका ध्यान हटाया गया। रॉयवादी और काँग्रेसवादी- ये दोनों तरह के समाजवादी लोग असमंजस के कारण दलदल में फंसे हुए हैं। एक सामान्य दुश्मन मान कर इस साम्राज्यवाद के खिलाफ अगर संघर्ष करना हो तो उसका यह मतलब नहीं कि सभी वर्गों को अपने वर्ग के हितों को नजरंदाज करते हुए एक संगठन में विलीन होना चाहिए। विभिन्न संगठनों का एक मोर्चा खोल कर साम्राज्यवाद से लड़ा जा सकता था। इस उद्देश्य को प्राप्त करने के लिए पूरे संगठन को बर्खास्त करने की जरूरत नहीं है। सभी संगठनों को समा लेने वाली संस्था की भी जरूरत नहीं है। सभी का मिला-जुला एक मोर्चा खोलना काफी है। आपका ध्यान इस ओर दिलाते हुए मुझे खेद महसूस होता है कि काँग्रेस के दो दक्षिणपंथी साम्राज्यवाद के नाम का सहारा लेकर कोई अलग संगठन

खड़ा करने में अड़चन बन रहे हैं यह कई लोगों की समझ में अब तक नहीं आया है। आपको भी मैं सचेत कर रहा हूँ कि हो सकता है आपसे भी यही गलती हो। राजनीति की इमारत वर्ग हित के अहसास पर खड़ी होनी चाहिए। वर्ग हित के अहसास की बुनियाद पर जिस राजनीति की इमारत खड़ी नहीं, वह राजनीति नहीं, ढोंग है।

इसीलिए जो दल वर्ग हित, वर्ग अहसास की बुनियाद पर आधारित हो उस पक्ष में आप शामिल हों। इस कसौटी पर कस कर देखें तो आपका जो विरोधी नहीं है, जिसके बारे में मैं जानता हूँ वह पक्ष है स्वतंत्र लेबर पार्टी। कामगारों के हितों को सबसे अधिक वरीयता देने वाला और स्पष्ट कार्यक्रम वाला यही इकलौता दल है। उसकी सुनिश्चित नीति है। सामान्य स्थितियों में वह कभी भी गैर-कानूनी मार्ग को अपनाएगा नहीं लेकिन वैसे ही हालात पैदा हों तो ऐसा करने से पीछे भी नहीं हटेगा। वर्ग-युद्ध टालने की भले उसकी इच्छा हो वह वर्ग संगठन के सिद्धांत का त्याग करने के लिए तैयार नहीं यह बात सही है