102 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
बन सकती है। आप अगर यह समझें तो खालिस राजनीतिक दल के बारे में आप समूचे भारत के कामगार वर्ग को प्रकाश-स्तंभ की तरह मार्गदर्शक साबित होंगे। सभी कामगारों की एक और सेवा आप कर सकते हैं। विधानसभा में आपको प्रतिनिधित्व का निश्चित प्रतिशत मिला हुआ है। ये आरक्षित सीटें कामगार वर्ग के लिए कितनी महत्वपूर्ण साबित हो सकती हैं इसका अहसास अभी कुछ कामगार नेताओं को नहीं है। चुनाव एक तरह का जुआ है। किसी पार्टी को किसी भी चुनाव पद्धति के जरिए विधानसभा में पक्के तौर पर मिलने वाली सीटों की संख्या बताई नहीं जा सकती। इतना ही नहीं, वरन्मतदाताओं के किसी गुट को किसी भी चुनाव पद्धति से उसकी जनसंख्या के अनुपात में सीटें मिल ही जाएंगी ऐसा भी नहीं। चुनावों के परिणाम कुछ दलां के लिए कभी-कभी कितने अप्रत्याशित और विनाशकारी साबित हुए यह इंग्लैंड के इतिहास के सहारे समझा जा सकता है। कई बार अल्पसंख्यक मतदाताओं को ही बहुसंख्य सीटें प्राप्त होती हैं। अपने यहाँ सीटों की संख्या निर्धारित होने के कारण इस तरह की संभावना नहीं होती। दलित वर्ग के लिए आरक्षित सीटों के बारे में सोचें तो पता चलता है कि वे केवल दलित वर्ग के लिए ही उपयोगी नहीं हैं वरन् वे समूचे कामगारों के लिए सहायकारी साबित होंगी। दलित वर्ग को निश्चित प्रतिनिधित्व मिलना पक्का होने के कारण अन्य कामगार वर्ग को अगर मदद की जरूरत पड़े तो उनका संगठन बनाने में भी वह बड़े पैमाने पर सहायक साबित हो सकता है। कामगार वर्ग को राजनीतिक प्रतिनिधित्व दिलाने में दलित वर्ग कितना सहायक सिद्ध हो सकता है यह पिछले चुनावों में हम देख चुकें हैं। पृथक मजदूर पार्टी के टिकट से चुनावों में उतरे तीन हिंदु उम्मीदवारों को दलित वर्ग ने मुंबई विधानसभा में चुनाव जिताकर भेजा और पृथक मजदूर संघ के टिकट के बिना चुनावों में केवल दलित वर्ग के समर्थन के साथ उतरे कई उम्मीदवारों को जिताने में उसने मदद की। जो हमारी कोशिशों से अपने हित को साधना चाहें वे उसे साध सकते हैं लेकिन यहाँ ध्यान देने की बात यह है कि इस देश की राजनीति में दलित वर्ग महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है यह वास्तविकता है। उनकी यह भूमिका उनके अपने लिए और कामगार वर्ग के लिए भी बेदह सहायक है। हालांकि, यह सब इस बात पर निर्भर करता है कि आप कितने कम समय में तथा कितने अच्छे तरीके से संगठित होंगे। आपको संगठित क्यों होना चाहिए और संगठन के सहारे आप क्या कर सकते हैं यह मैंने पहले ही आपको बताया है। अब इतना आपको बता कर मैं अपना भाषण पूरा करता हूँ कि अपना संगठन
खड़ा करने के काम में आपको बिल्कुल देर नहीं करनी चाहिए। इस सभा के अध्यक्ष पद को स्वीकारने के लिए आमंत्रित कर आपने मेरा जो सम्मान किया है उसके लिए मैं आपके प्रति आभारी हूँ। मैं आपके लिए सुयश की कामना करता हूँ।’’ ख्6,
- डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर रांची भाषणेः मा. फ. गांजरे खंड 2, पुनर्मुद्रण 10-4-1986, पृ. 132-148