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* शील और सौजन्य के अभाव में शिक्षित व्यक्ति हिंस्त्र पशु से भी
क्रूर अैर डरावना होता है
5 फरवरी, 1938 के ‘जनता’ अखबार में घोषित कार्यक्रम के अनुसार मनमाड में 12 और 13 फरवरी, 1938 को अखिल जी.आई.पी. रेलवे अस्पृश्य कामगार परिषद् के भव्य मंडप में डॉ. बाबासाहेब की अध्यक्षता में मुंबई इलाका अस्पृश्य युवक परिषद् हुई। 12 तारीख को रात 8 बजे यह परिषद् शुरू हुई जिसमें पहले श्री मुरलीधर पगारे का भाषण हुआ। उसके बाद विभिन्न प्रस्ताव रखे और मंजूर किए गए। उसके बाद डॉ. अम्बेडकर का भाषण हुआ।
अपने अध्यक्षीय भाषण में बाबासाहेब अम्बेडकर ने कहा,
‘‘आज की इस युवा परिषद् का युवा न होते हुए भी मुझे अध्यक्ष बनाया गया है। मेरे जीवन के 40 वर्ष बीत गए हैं और 40 वर्षों की उम्र तक व्यक्ति को आमतौर पर युवा माना जाता है, खैर! आज की परिषद् युवाओं के लिए होने के बावजूद यहाँ मैं विभिन्न आयु वर्ग के लोगों को देख रहा हूँ। युवाओं की इस परिषद् में बूढ़े हैं और मेरी दाहिनी ओर को पूरा ब्लॉक बहनों से खचाखच भरा हुआ है। सो, हो सकता है, युवाओं को उद्देश्य कर आज की सभा में मैं जो भाषण दूँगा वह औरों को थोड़ा असंगत लगे। क्योंकि आज मैं केवल युवाओं को उद्देश्य कर ही बोलने वाला हूँ। आज की युवा परिषद् बहुत महत्वपूर्ण है। जनसंख्या में युवाओं का काफी बड़ा अनुपात है। बूढ़े लोगों की संख्या कम है और उनमें से भी कई लोगों की लकडि़यां ‘ओंकार धाम’ पहुँच चुकी हैं। बचपन से वे जिन हालात में बड़े हुए हैं उससे छुटकारा पाने के लिए उनमें से अधिकतर लोग आज तैयार नहीं है। जिन हालात में वे बड़े हुए उनसे चिपके रहने की ओर उनका झुकाव दिखाई देता है। उनसे किसी और काम की हम उम्मीद नहीं रखेंगे। वे हमारे आंदोलन के आड़े नहीं आए इतना भी हमारे उनका बहुत बड़ा योगदान साबित होगा।
असल में आज की युवा सभा, युवक संघ की ओर से आयोजित की जानी चाहिए थी। लेकिन आज वह स्वतंत्र लेबर पार्टी की ओर से आयोजित की जा रही है। अच्छा ही होता कि अगर यह सभा युवाओं की ओर से आयोजित होती। युवाओं में छुटपुट मतभेद हैं यह बात सच है। पहले यह घोषणा हो चुकी थी कि परिषद् का आयोजन नासिक
* 26 फरवरी, 1938, प्रस्तुत भाषण 12 तारीख का होने के बावजूद परिषद की खबरों में व्यवधान न हो,
इसलिए 13 तारीख के बाद प्रकाशित किया जाएगा-संपादक