119 12.2.1938 शील और सौजन्य के अभाव में शिक्षित व्यक्ति हिस्र पशु से भी क्रूर और डरावना होता है - मनमाड - Page 126

105

घंटों तक लगातार टेबल-कुर्सी पर बैठकर काम करना आना चाहिए। जिन्हें अपनी बुद्धि का प्रभाव पढ़ाना है उन्हें परिश्रम लेना चाहिए, तप करना चाहिए।

संकट में या दरिद्रता में फंसने पर इंसान निराश होता है। उसके मन में यह भाव होता है कि मुझे सफलता नहीं मिलेगी। इस भावना से ग्रस्त व्यक्ति जीवन जीने में असफल हो जाता है। हरेक युवा को कभी आशा नहीं त्यागनी चाहिए। जिस दिन वह आशा को त्याग देगा तभी से उसके जीने का उद्देश्य समाप्त हो जाएगा। फिर वह जिए या मरे केई फर्क नहीं पड़ेगा। हर युव में महत्वकांक्षा होनी चाहिए। महत्वकांक्षा के बगैर इंसान ना तो हाथ-पैर चलाएगा और न काई कोशिश करेगा। इसीलिए अस्पृश्य माने गए युवाओं में पहले महत्वकांक्षा के बीज अंकुरित होने चाहिए। मामलातदार, कलक्टर के दफतर जाओ या कोई कोर्ट जाओ हर जगह इन सफेद पोश भट-बामणें की ही संख्या बहुत अधिक होती है। इन हालात से बाकी लोगों का नाराज होना भले स्वाभाविक हो आज आपको निराश नहीं होना है। मन में ऊँची महत्वकांक्षा को पालते हुए उस दिशा में जी-तोड़ कोशिशें करनी चाहिए। मुझे मुंबई का गवर्नर भी बनाना जाए तो वह कम है ऐसा मानने वालों में से मैं एक हूँ। आप में से हरेक को ऊँची महत्वकांक्षा पालकर उसे फलीभूत करने की जी-तोड़ कोशिश करनी चाहिए, यही इतना सब बताने के पीछे मेरा उद्देश्य है।

युवाओं को अंदर कुछ और तथ बाहर कुछ और की आदत लगानी नहीं चाहिए। सत्य को ना छोड़ें। सत्य की तात्कालिक विजय भले ना होती हो लेकिन विजय आखिर सत्य की ही होती है। हममें दो मुँहापन नहीं होना चाहिए। दुनिया को जब एक बार पता चल जाए कि यह व्यक्ति दोमुँहा है तो फिर कोई हमारा भरोसा नहीं करेगा।

आज विद्या के दरवाजे, शिक्षा के दरवाजे हम सबके लिए खुल चुके हैं। आज शिक्षा की जो रियायतें उपलब्ध हैं वे हमारे जमाने में बिल्कुल नहीं थी। उस जमाने में हमें कहीं से कोई मदद उपलब्ध नहीं थी। यहाँ के विश्वविद्यालय में पढ़ते समय मेरे पिताजी, परिवार के अन्य लोग, एक बकरी, चूल्हा, चूल्हे के ईंधन की लकडि़याँ, हफते की मंडी से खरीदी जरूरत की चीजें आदि सभी सामान के साथ 8 × 8 के कमरे में रह कर कॉलेज की पढ़ाई करनी पड़ती थी। आज यह हाल बदल चुका है। साधनों के अभाव में शिक्षा नहीं पाई जा सकती यह शिकायत आज अगर हम करें तो वह निश्चय ही निराधार साबित होगी।

मेरी बड़ी इच्छा है कि हममें से हरेक को विद्यावान होना चाहिए। साथ ही, मुझे आज विद्या से, शिक्षा से बड़ा डर भी लगता है। पढ़े-लिखे लोगों से मुझे जैसा डर लगता है वैसा सबको लगना चाहिए। क्योंकि शिक्षा तलवार है, शिक्षा शस्त्र है। कोई आदमी अगर तलवार लेकर आता है तो आप सभी उससे डरेंगे। शिक्षा का अस्त्र हमेशा