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गरीबों के पेट पर लात मारने वाली सरकार का सत्ता से हटना ही
बेहतर है *
25 फरवरी, 1938 को दोपहर 2 बजे इस वर्ष के बजट अधिवेशन की शुरूआत हुई। अधिवेशन के अध्यक्ष थे सम्माननीय मावलणकर। कई लोग इस अधिवेशन में उपस्थित थे। इस अधिवेशन में पैनल ऑफ चेयरमेन की पद पर (1) खान बहादुर अब्दुल्ला लतीफ, (2) स्वतंत्र लेबर पार्टी के श्री राजाराम आर. भोले, (3) मि. ब्राँबल और (4) सर एस. टी. कांबली की नियुक्ति किए जाने की घोषणा सम्माननीय ने स्वीकार की। पहले सवाल-जवाब हुए और उसके बाद एसेंब्ली के आगे सम्माननीय लट्ठे ने 1937-38 का बजट रखते हुए अपना भाषण किया। यह भाषण करीब दो घंटों तक चला था।
श्री लट्ठे के भाषण के बाद शुक्रवार की बैठक का कामकाज पूरा हुआ। शनिवार बजट पर चर्चा का दिन था। लेकिन उस दिन मुस्लिम लीग की सदस्या मिसेज सलिमा फैज तय्यबजी ने छोटा-सा भाषण देकर नए बजट में लड़कियों की शिक्षा का योग्य प्रबंध करने के लिए सम्मानीय फण्डणीस का अभिनंदन किया। इसके बाद श्री बाबूभाई पटेल ने बजट का अभिनंदन किया। उनके बाद उस दिन कोई और बोलने के लिए उठकर खड़ा नहीं हुआ। इसलिए मंगलवार तक एसेंब्ली की बैठक को स्थगित किया गया। मंगलवार के दिन पहले सवाल-जवाब का सत्र हुआ। उसके बाद बजट पर चर्चा की शुरूआत हुई। आज की बैठक में श्री जमनादास मेहता का पहला भाषण हुआ। बुधवार की बैठक की शुरूआत के बाद 2.30 बजे स्वतंत्र लेबर पार्टी के नेता डॉ. बबासाहेब अम्बेडकर का भाषण हुआ।
डॉ. अम्बेडकर ने अपने भाषण में कहा,
मुंबई सरकार के नए बजट .......... पर कल और परसों जो भाषण हुए उनमें इस बजट का अभिनंदन किया गया है। लेकिन खेद के साथ मुझे यह कहना पड़ेगा कि मैं इसमें शामिल नहीं हो सकता। बजट पर नजर डालते ही, पहली नजर में ही, यह बजट निराशाजनक लगता है। बजट की योजना इस प्रकार की गई है कि अमीरों की जेब को सुरक्षित रख कर गरीबों को दुख-दर्द झेलने पर मजबूर किया गया है। इस बजट से भावी सुखदायी हालात का जरा भी अनुमान नहीं होता। न ही ऐसा लगता है कि यह हमारे
* ख्., जनता, 5 मार्च, 1938