108 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
प्रांत के उज्जवल भविष्य की शुरूआत है। पोले आश्वासनों पर बजट की इमारत खड़ी है। हाँ, इस बजट में पुलिस फोर्स के बारे में की गई योजना कुछ हद तक अभिनंदनीय है। लेकिन इस योजना का श्रेय मैं ना. फड़णिस से अधिक गृहमंत्री को देना ही पसंद करूंगा। इसी पुलिस बल के बारे में वर्तमान सत्ताधारी काँग्रेस और पुरानी काँग्रेस का नाता कैसे असंगत था इसका अहसास सभी को है। काँग्रेस के असहकारिता आंदोलन के दौरान काँगे्रस को पुलिस के बारे में इतना अपनत्व महसूस नहीं होता था। अनंगिनत खदर की टोपीधारी काँग्रेस वालों के मुँह से ‘पीती पगड़ी हाय हाय’ नारे निकाले हुए जिन लोगों ने सुना था उसी काँग्रेस को आज सत्ता में आने के बाद 36 हजार रुपयों की अतिरिक्त राशि आरक्षित करनी पड़ी यह जितने आश्चर्य और आनंद की बात है। वर्तमान काँग्रेस सरकार एसेंब्ली के अधिकारों पर अतिक्रमण कर रही है ऐसा लगता है। अब तक किसी भी सरकार द्वारा अपने ही अधिकार के तहत बजट में व्यय होने वाली बड़ी रकमों को तय नहीं मान लिया था। व्यय होने वाली रकम के बारे में सरकार को पहले से एसेंबली को सूचित करना चाहिए था। दूसरी बात यह है कि सरकार को चाहिए था कि वह पहले एकाउंटेंट जनरल को इस बात की सूचना देती कि उक्त रकम का उपयोग किस प्रकार किया जाने वाला है। लेकिन सत्ता के बल पर इन सभी बातों को नजंर दाज कर आज मुंबई सरकार अपनी कल्पना के सहारे बनाए हवाई किलों के निर्माण के लिए 36 लाख रु. इक्ट्ठा कर रही है। इस मामले में एसेंब्ली की राय तो नहीं ही ली गई है और अपने विधायक काम के बारे में थोड़ी-सी भी जानकारी नहीं दी है। लगता है गृहमंत्री की यह ईमानदारी राय है कि इस एसेंब्ली को कानूनों के तहत नियम बनाने का कोई हक नहीं पहुँचता। आज वे इस सदन में अनुपस्थित हैं इसलिए इस बारे में उनका पक्ष जानना संभव नहीं हैं फिर भी, गृहमंत्री द्वारा किए जा रहे सत्ता के गलत इस्तेमाल के बारे में मुझे यहाँ स्पष्ट रूप से कटाक्ष करना पड़ रहा है।
बताया जा रहा है कि नए, लोकोपयोगी काम करवाने के लिए सरकार ने एक करोड़ 16 लाख रुपयों की योजना बनाई है। लेकिन इन सभी आंकड़ों को खंगालने पर हाथ क्या आएगा? इस बड़ी रकम से हर वर्ष जो खर्चा होता है उसमें से 48 लाख 11 हजार रुपये तथा शराब पर पाबंदी लगाने के खाते में 31 लाख रुपए अलग रहे हैं। इस रकम को अगर मूल रकम से हटा दें तो जनता के उपयोग के अन्य लोगों के लिए केवल 37 लाख रुपए ही बचते हैं। इस प्रकार शिक्षा, पानी की आपूर्ति, स्वास्थ्य संबंधी मदद आदि पर व्यय होने वाली रकम वापिस मिलना असंभव होता है। या उस मद में खर्च की गई रकम से आय प्राप्त होना असंभव होता है। बेरोजगारी हटाना, स्वास्थ्य बीमा, बुढ़ापे के लिए बीमा, दुर्घटना बीमा, महिलाओं को जच्चगी के लिए आर्थिक सहायता जैसे कई जन-कल्याण के काम करने हैं। लेकिन इन मामलों के बारे में मुंबई सरकार चुप्पी साध