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गई है। आज इन जन-कल्याण के कामें के लिए जो रकम रखी गई है वह अगले साल में भी रखना मुश्किल होगा ऐसा लगता है।
कामगारें के हित के बारे में नीतिः पिछले अगस्त माह में इसी सत्ताधारी काँग्रेस द्वारा कामगारों की हितरक्षा के लिए जो नीति तय किए जाने की घोषण की थी उस योजना के अनुसार इस प्रांत पर कितना खर्च होगा इसका अंदाजा भी सम्माननीय गृहमंत्री देते तो अच्छा होता।
हमारे प्रांत के लोगों के लिए हितकारी योजनओं में से स. फडणीज की योजना को कुछ योजना को कुछ समय परे भी रख दें तब भी मेरी अल्पबुद्धि के अनुसार इस योजना पर न्यूनतम 24 करोड़ रुपयों का खर्च आएगा। इतना व्यय जो झेल पाए वही इस प्रांत सरकार बनने के लायक है यह मेरी राय है। लेकिन क्या हमारे प्रांत की सरकार इतनी बड़ी रकम जुटाने की कोशिश करेगी? पश्चिमी दशों की सरकारें प्रति व्यक्ति कितना खर्च करती हैं यह अगर देखा जाए तो इतना चलेगा कि कनाडा 9 पौंड, 8 शिलिंग, द. आस्ट्रेलिया 19 पौंड, आइरिश फ्री स्टेट 10 पौंड और मुंबई 7 पेन्स। यह अनुपात देख हमारी बुरी आर्थिक स्थिति का हाल कितना भयंकर है इसका पता चलेगा। हमारे प्रांत की आमदनी का विवरण देखें तो निराशा घेर लेती है। 1922 से 1935 के दौरान अन्य प्रांतों की आय में जो वृद्धि हुई है उसका प्रतिशत इस प्रकार है- मद्रास 26.5, पंजाब 28, संयुक्त प्रांत 16.5, असम 14.5, बंगाल 11.5 और मुंबई में केवल 3 (तीन) प्रतिशत। पिछले 13-14 सालों में अतिरिक्त कर से हुई आमदनी को अगर घटा दें तो मुंबई की आय 5.5 प्रतिशत घटी हुई दिखाई देगी। ऐसे हालात में हमारी सरकार अगर शराब पर पाबंदी लगाने का आंदोलन छेड़ती है तो यह डूबते पर बोझ लादने की मानसिकता को अपनाना है। इस योजना को अमल में लाते हुए अन्य किसी मद में होने वाली आय को बिना गिने भू-जस्व को कम करने की नीति भी अपनाई गई है। मेरा यह कहना है कि राजस्व में छूट नहीं दी जाए। मेरा कटाक्ष इस बात की ओर है कि शराब पर पाबंदी और भू-राजस्व में छूट इन दो योजनाओं पर अगर अमल किया गया तो सरकारी खजाना खाली हो जाएगा। उसे फिर भरने के लिए क्या किसी विधायक योजना का निर्माण किया गया है?
पिछले बजट के समय ना. फडणीस ने अपने भाषण में जो आशा से भरपूर वचन दिए थे उन्हें पढ़ने के बाद आज के बजट में क्या दिखाई देता है? उस वक्त दिए गए वचनों का आज के बजट में जिक्र तक नहीं है। उस बजट के समय बहुजन समाज के हितों के बारे में जो साहस आश्वासन दिया गया था वह इसमें कहीं दिखाई नहीं देता। इस बजट में कोई नया कर नहीं है इसलिए इसकी प्रशंसा की जा रहा है इसका मुझे